
गेहूं की खेती
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देश में गेहूं की खेती हर वर्ष नई चुनौतियों का सामना करती है। कभी मौसम की मार, कभी रोगों का प्रकोप और कभी घटती उत्पादकता। पिछले कुछ वर्षों में गेहूं की फसलों को सबसे अधिक नुकसान पीला रतुआ (Yellow Rust) जैसे फफूंदजनित रोग ने पहुंचाया है, जिसने कई राज्यों में किसानों की उपज 30 से 50 फीसदी तक घटा दी। ऐसी स्थिति में किसान उन किस्मों की तलाश में रहते हैं जो कम समय में तैयार हों, रोगों का असर कम हो और उत्पादन अधिक दें। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई गेहूं की उन्नत किस्म एचडी 2967, आज देशभर के किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है।उत्तरी भारत के किसानों की पहली पसंद बनी एचडी 2967
एचडी 2967 किस्म हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में तेजी से प्रचलित हो चुकी है। यह किस्म अगेती श्रेणी की है और कम समय में तैयार हो जाती है। इसकी मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता इसे खास बनाती है, खासकर पीले रतुए जैसे खतरनाक रोग के खिलाफ इसकी पकड़ काफी मजबूत है। यही कारण है कि किसान इसे सुरक्षित, भरोसेमंद और उच्च उत्पादन वाली किस्म के रूप में देखते हैं। इसके पौधे मजबूत और ऊंचाई में संतुलित होते हैं, जिससे गिरने (Lodging) की समस्या कम होती है और फसल स्थिर रूप से तैयार होती है।
1 से 15 नवंबर तक बुवाई सबसे उपयुक्त
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार एचडी 2967 की बुवाई का आदर्श समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है। समय पर बोई गई फसल—
- जल्दी तैयार होती है
- अधिक उपज देती है
- रोगों का खतरा कम रहता है
देर से बुवाई करने पर इसके पौधे जल्दी पकने लगते हैं, जिससे अनाज का विकास प्रभावित होता है और उत्पादन घट सकता है।
उत्तम गुणवत्ता का तूड़ा, पशुपालन में भी लाभ
- इस किस्म का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे निकलने वाला तूड़ा (Straw) उच्च गुणवत्ता का होता है।
- पौधे की बढ़वार अधिक होने के कारण प्रति एकड़ अधिक चारा मिलता है
- पशुपालन में उपयोगी
- बाजार में भी अच्छी कीमत प्राप्त होती है
- कई किसान बताते हैं कि इस किस्म के तूड़े की मजबूती और मात्रा अन्य किस्मों की तुलना में अधिक लाभ देती है।
66.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन क्षमता
कृषि अनुसंधान के अनुसार इस किस्म की औसत उपज 50.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जबकि अनुकूल परिस्थितियों में यह 66.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है। यह उत्पादन क्षमता सामान्य किस्मों की तुलना में काफी अधिक है। इसके प्रमुख कारण हैं—
- रोग प्रतिरोधक क्षमता
- समय पर बुवाई के साथ बेहतर प्रदर्शन
- मजबूत तने और संतुलित पौध संरचना
- कम कीटनाशक की जरूरत
- कुल मिलाकर यह किस्म स्थिर और उच्च उत्पादन देने वाली मानी जाती है।
किसानों को एचडी 2967 से मिलते हैं ये खास फायदे
- पीले रतुआ रोग से सुरक्षा, कम कीटनाशक खर्च
- अगेती किस्म, जल्दी पकने वाली
- 50.1 से 66.1 क्विंटल/हेक्टेयर तक उत्पादन
- उच्च गुणवत्ता का तूड़ा
- कम लागत में अधिक मुनाफा
- उत्तर भारत के अधिकांश गेहूं उत्पादक राज्यों में सर्वाधिक लोकप्रिय किस्म
कम लागत में अधिक मुनाफे की गारंटी
किसान लगातार ऐसी किस्मों की तलाश में रहते हैं जो मौसम और रोगों दोनों से लड़ सकें। एचडी 2967 किस्म किसानों की इन्हीं जरूरतों को पूरा करती है। यह किस्म न सिर्फ उत्पादन बढ़ाती है, बल्कि तूड़ा और अनाज दोनों में बेहतर गुणवत्ता प्रदान करती है। यदि किसान समय पर बुवाई करें, तो इसकी पूरी उत्पादन क्षमता का लाभ आसानी से उठाया जा सकता है।




