यूपी पुलिस–मेटा की साझेदारी बनी जीवन रक्षक, इटावा में सोशल मीडिया अलर्ट से छात्र की जान बची

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उत्तर प्रदेश पुलिस ने तकनीक को मानवता से जोड़ते हुए एक बार फिर साबित कर दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन रक्षक भी बन सकते हैं। मेटा कंपनी के साथ स्थापित समन्वय प्रणाली के जरिए इटावा में एक 20 वर्षीय छात्र की जान समय रहते बचा ली गई।

ये है मामला 

मामला तब सामने आया जब जसवंतनगर क्षेत्र के रहने वाले बीएससी छात्र ने इंस्टाग्राम पर एक चिंताजनक स्टोरी साझा की। तस्वीर में रस्सी और भावुक संदेश दिखाई देने के बाद मेटा के सेफ्टी सिस्टम ने इसे आत्महत्या से जुड़ा संभावित खतरा मानते हुए तुरंत अलर्ट जारी किया। यह सूचना सीधे पुलिस महानिदेशक मुख्यालय स्थित सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर तक पहुंची।

रात 10:16 बजे मिले इस अलर्ट को गंभीरता से लेते हुए मुख्यालय से इटावा पुलिस को जरूरी जानकारी—मोबाइल नंबर और संभावित लोकेशन—तत्काल साझा की गई। यूपी पुलिस की यह डिजिटल-इमरजेंसी चेन बिना किसी देरी के सक्रिय हुई। थानाध्यक्ष जसवंतनगर कमल भाटी अपनी टीम के साथ कुछ ही मिनटों में बताए गए पते पर पहुंचे।

घर पर युवक न मिलने पर पुलिस ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। मेटा से मिले संकेतों के आधार पर युवक को जंगल की ओर जाते हुए ट्रेस किया गया, जहां वह आत्मघाती कदम उठाने की स्थिति में था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बातचीत की, भरोसा दिलाया और सुरक्षित वापस ले आई।

बातचीत में सामने आया कि निजी रिश्ते टूटने के बाद युवक मानसिक दबाव में था। पुलिस ने न सिर्फ स्थिति संभाली, बल्कि संवेदनशील काउंसलिंग कर उसे और उसके परिवार को मानसिक सहयोग भी दिया।

अब तक बचाई गई इतनी जानें

पुलिस मीडिया सेल के अनुसार, वर्ष 2022 से मेटा और उत्तर प्रदेश पुलिस के बीच बनी यह समन्वय व्यवस्था लगातार कारगर साबित हो रही है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सामने आने वाले आत्मघाती संकेतों की सूचना मेटा द्वारा पुलिस को दी जाती है। इसी तकनीकी साझेदारी के चलते जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 तक यूपी पुलिस 1700 से अधिक लोगों की जान बचा चुकी है।

यह घटना बताती है कि जब तकनीक, सतर्कता और संवेदनशील पुलिसिंग एक साथ काम करें, तो समय से पहले बुझती जिंदगी को फिर से रोशनी मिल सकती है।