Rice Imports: 2027 से भारत-पाकिस्तान से चावल आयात पर EU लागू करेगा सख्त नियम, कितना पड़ेगा असर?

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बासमती चावल

बासमती चावल
– फोटो : ani

विस्तार


यूरोपीय संघ (EU) भारत, पाकिस्तान और अन्य एशियाई देशों से चावल आयात पर सख्त प्रतिबंध लागू करने जा रहा है। परिषद और यूरोपीय संसद ने चावल आयात के लिए ‘स्वचालित सेफगार्ड मैकेनिज्म’ लागू करने पर सहमति जताई है, जिसके तहत निर्धारित सीमा से अधिक आयात होने पर अतिरिक्त शुल्क स्वतः लागू हो जाएगा। यह नियम 1 जनवरी 2027 से लागू किया जाएगा।यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर तेजी से प्रगति हो रही है और 23 में से 11 अध्यायों पर सहमति बन चुकी है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि EU एक तरफ बाजार खोलने की बात कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ उसी उत्पाद पर सुरक्षा दीवार खड़ी कर रहा है।

कैसे लागू होगा नया नियंत्रण?
EU परिषद के प्रस्ताव के अनुसार यदि भारत या अन्य एशियाई देशों से चावल आयात ऐतिहासिक औसत स्तर से ऊपर चला जाता है, तो उस पर MFN शुल्क लग जाएगा। इस फैसले के बाद आयातित चावल प्रीमियम शुल्क के दायरे में आएगा और EU बाजार में स्थानीय उत्पादकों को लाभ मिलेगा। कानूनी अनुमोदन के बाद यह प्रावधान आधिकारिक रूप से लागू होगा।

टैरिफ सिस्टम ऐसे बदलेगा
फेडरेशन ऑफ यूरोपियन राइस मिलर्स (FERM) ने EU को शुल्क संरचना बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है—

श्रेणीवर्तमान शुल्क प्रस्तावित शुल्क
मिल्ड चावल200 यूरो/टन से कम416 यूरो/टन
हस्क्ड (ब्राउन) चावललगभग 65 यूरो/टन264 यूरो/टन

FERM का दावा है कि मौजूदा शुल्क “पुराने बाजार ढांचे” पर आधारित है और आधुनिक व्यापार वास्तविकता को नहीं दर्शाता।

चावल आयात चार गुना बढ़ा, उत्पादन घटा
EU का तर्क है कि चावल उत्पादन बीते 20 साल में 1.64 मिलियन टन से घटकर 1.47 मिलियन टन रह गया है।  लेकिन आयात 6 लाख टन से बढ़कर करीब 2.3 मिलियन टन पहुंच चुका है। विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान से आयात पिछले दो दशक में लगभग 5 गुना बढ़ा। जबकि थाईलैंड और वियतनाम का स्तर लगभग वही रहा। कंबोडिया और म्यांमार के ‘शून्य शुल्क लाभ’ को भी EU एक खतरे के रूप में देख रहा है।

भारत-पाकिस्तान पर सीधा असर क्यों?

  • 2004-05 में EU को मिलने वाले चावल का
  • 80-90 प्रतिशत हिस्सा ब्राउन/हस्क्ड राइस होता था

अब यह अनुपात

  • केवल 50 प्रतिशत रह गया है
  • बाकी हिस्सा मिल्ड चावल का है, जो मूल्यवर्धित उत्पाद माना जाता है।
  • मिल्ड राइस पर शुल्क बढ़ने से भारतीय-पाकिस्तानी कंपनियों को नुकसान होगा।

भारतीय निर्यातकों की नई चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार पैक्ड चावल निर्यात (जैसे बासमती) पर विशेष टैक्स लग सकता है। EU स्थानीय मिलर्स को खुद ब्रांड बनाने का अवसर देना चाहता है। बड़े निर्यातकों को EU में संयंत्र स्थापित करना पड़ सकता है। पहले ही एक बड़ी भारतीय कंपनी दावत ने नीदरलैंड में प्लांट स्थापित कर दिया है।

यूरोप में नया गठबंधन
आठ यूरोपीय चावल उत्पादक देशों ने नया संगठन EURice बनाया है। यह नीति समन्वय करेगा, टैरिफ का दबाव बढ़ाएगा, EU बाजार में बाहरी देशों की हिस्सेदारी सीमित करेगा। इसकी वार्षिक अध्यक्षता सदस्य देशों में घुमावदार तरीके से रहेगी।

भारत-ईयू FTA में नई बाधा
उद्योग विशेषज्ञों का मत है कि यह कदम FTA वार्ताओं को जटिल बना सकता है। भारत को अब चावल सेक्टर को “संवेदनशील उत्पाद” की सूची से बाहर करवाने और सेफगार्ड तंत्र को सीमित समय या मात्रात्मक प्रावधान तक सीमित कराने के लिए प्रयास करने होंगे। विश्लेषकों का मानना है कि यदि समाधान न निकला तो भारत के प्रीमियम चावल निर्यात को सीधा झटका लगेगा।