ये है मामला
वीडियो में महिला इंस्पेक्टर लड़कियों को सुरक्षा के लिहाज से गार्जियन के साथ आने की नसीहत देती नजर आती हैं। पुलिस का कहना है कि यह कदम पूरी तरह एहतियातन उठाया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नाबालिग सुरक्षित हैं और किसी जोखिम में नहीं हैं। पूछताछ के दौरान पुलिस ने लड़कियों के परिजनों से फोन पर संपर्क किया और उनकी जानकारी व सहमति की पुष्टि की।
हालांकि, सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस तरीके पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि खुले कैमरे के सामने नाबालिगों से पूछताछ करना उनकी निजता से जुड़ा विषय है और इसे अधिक संवेदनशील ढंग से किया जाना चाहिए था। कुछ लोगों ने इसे सुरक्षा के नाम पर जरूरी कदम बताया, तो कुछ ने पुलिस को यह सलाह दी कि ऐसे मामलों में कैमरे का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाए।
इंस्पेक्टर ने कहा ये
महिला इंस्पेक्टर मंजू सिंह का पक्ष यह है कि मिशन शक्ति अभियान का उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मंदिर परिसर में बाहर से आए बच्चों को देखकर सतर्कता बरतना जरूरी था। परिजनों से बातचीत के बाद जब स्थिति स्पष्ट हो गई, तो किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई और सभी को जाने दिया गया।
यह मामला अब सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं रहा, बल्कि इसने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि सुरक्षा और संवेदनशीलता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। पुलिस की मंशा भले ही सुरक्षा की हो, लेकिन ऐसे मामलों में व्यवहार, भाषा और प्रक्रिया को लेकर सार्वजनिक अपेक्षाएं भी उतनी ही अहम हैं।












