
अमेरिकी बाजार में भारतीय चावल पर 10% आयात शुल्क लगता था, जिसे बढ़ाकर 50% कर दिया गया है।
– फोटो : ani
विस्तार
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के अनुसार वित्त वर्ष 2024–25 में भारत ने अमेरिका को 337.10 मिलियन डॉलर का 2.74 लाख टन बासमती चावल भेजा। इससे अमेरिका भारत के लिए चौथा सबसे बड़ा बासमती बाजार बन गया। इसी अवधि में भारत ने 54.64 मिलियन डॉलर का 61,341 टन गैर-बासमती चावल भी निर्यात किया, हालांकि इस श्रेणी में अमेरिका 24वां सबसे बड़ा बाजार रहा।IREF का कहना है कि अमेरिका में भारतीय चावल की मांग वहां रहने वाले खाड़ी देशों और भारतीय उपमहाद्वीप के प्रवासी समुदायों से सबसे ज्यादा आती है। बिरयानी जैसी लोकप्रिय डिश के कारण बासमती की मांग लगातार बढ़ रही है, क्योंकि इसका स्वाद, खुशबू और दाने की लंबाई किसी अन्य चावल से तुलना में बेहतर है।
अमेरिका में बढ़े शुल्क के बाद भी निर्यात जारी
फेडरेशन ने बताया कि हाल ही तक अमेरिकी बाजार में भारतीय चावल पर 10% आयात शुल्क लगता था, जिसे बढ़ाकर 50% कर दिया गया है। इसके बावजूद बासमती की शिपमेंट जारी है, क्योंकि मांग पूरी तरह उपभोक्ता जरूरत के आधार पर होती है और अधिकतर ऑर्डर पहले से बुक रहते हैं।
फेडरेशन के अनुसार, बढ़े शुल्क का बोझ ज्यादातर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ा है, क्योंकि खुदरा बाजार में कीमतें बढ़ी हैं। वहीं, भारत के किसानों और निर्यातकों को मिलने वाली कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया।
भारतीय चावल की गुणवत्ता का कोई विकल्प नहीं
IREF ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी चावल भारतीय बासमती का विकल्प नहीं बन सकता। बासमती की अनूठी खुशबू, स्वाद और पकने पर दानों की लंबाई बढ़ने जैसी विशेषताएं उसे अलग पहचान देती हैं, जो अमेरिकी किस्मों में नहीं मिलतीं। यही कारण है कि भारतीय चावल के लिए अमेरिकी बाजार में स्थायी और मजबूत मांग बनी रहती है।
भारत दुनिया का भरोसेमंद सप्लायर
IREF के वाइस प्रेसिडेंट देव गर्ग ने कहा कि भारतीय चावल उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और मजबूत है। अमेरिका एक अहम बाजार जरूर है, लेकिन भारत के निर्यात कई देशों में फैले हुए हैं। भारत सरकार और फेडरेशन मिलकर नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।
फेडरेशन ने दोहराया कि भारत–अमेरिका चावल व्यापार पूरी तरह उपभोक्ता पसंद, सांस्कृतिक खानपान और गुणवत्ता आधारित मांग पर निर्भर है, और भारत दुनिया को प्रीमियम क्वालिटी चावल उपलब्ध कराने में भरोसेमंद भागीदार बना रहेगा।




