राजधानी दिल्ली इन दिनों खतरनाक वायु प्रदूषण और घने कोहरे की गिरफ्त में है। हालात ऐसे हैं कि आम लोगों को घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी जा रही है, लेकिन ट्रैफिक पुलिसकर्मी इन्हीं परिस्थितियों में सड़कों पर खड़े रहकर व्यवस्था संभाल रहे हैं। भीड़भाड़ वाले चौराहों, बॉर्डर प्वाइंट्स और मुख्य सड़कों पर रोज़ाना घंटों ड्यूटी करने वाले ये जवान जहरीली हवा का सबसे सीधा असर झेल रहे हैं।
छह हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात
दिल्ली की सड़कों पर करीब छह हजार ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। इनकी जिम्मेदारी सिर्फ यातायात सुचारु रखना नहीं, बल्कि प्रतिबंधित वाहनों की एंट्री रोकना, नियमों का पालन कराना और प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करना भी है। जब एयर क्वालिटी इंडेक्स कई इलाकों में 500 के पार पहुंच रहा है, तब पीएम-2.5 और पीएम-10 जैसे सूक्ष्म कण सीधे उनके शरीर में प्रवेश कर रहे हैं, जो सेहत के लिए गंभीर खतरा माने जाते हैं।
बढ़ते स्वास्थ्य जोखिम को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जवानों के लिए विशेष विंटर सेफ्टी प्लान लागू किया है। इस योजना के तहत हाई-क्वालिटी एयर फिल्टर मास्क, सर्दियों के अनुकूल सुरक्षात्मक गियर और नियमित स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक खुले वातावरण में तैनात पुलिसकर्मी सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
मैदान में तैनात पुलिसकर्मियों का कहना है कि मास्क पहनने के बावजूद सांस लेने में दिक्कत, गले में जलन और आंखों में परेशानी महसूस होती है। इसके बावजूद वे पूरी जिम्मेदारी के साथ ड्यूटी निभा रहे हैं, ताकि प्रदूषण और न बढ़े और ट्रैफिक व्यवस्था बनी रहे।
डॉक्टरों ने कहा ये
चिकित्सकों के मुताबिक, लगातार जहरीली हवा में काम करने से फेफड़ों, दिल और दिमाग पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में जवानों की ड्यूटी रोटेशन और बेहतर सुरक्षा साधन बेहद जरूरी हैं। दिल्ली की जहरीली हवा में ट्रैफिक पुलिसकर्मी न सिर्फ शहर की रफ्तार संभाल रहे हैं, बल्कि अपनी सेहत को दांव पर लगाकर व्यवस्था और पर्यावरण दोनों की रक्षा कर रहे हैं।












