पशु जीनोमिक्स के क्षेत्र में बड़ा कदम: देश में बनेगी उन्नत लैब, भारत और ब्राजील की कंपनियों के बीच समझौता

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भारत और ब्राजील के बीच समझौता – फोटो : सोशल मीडिया

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भारत और ब्राजील ने दुग्ध पशुओं की आनुवंशिक गुणवत्ता में सुधार के लिए एक ऐतिहासिक सहयोग की शुरुआत की है। दोनों देशों के बीच त्रिपक्षीय समझौता (MoU) और प्रोजेक्ट कोलैबोरेशन टर्म (PCT) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ब्राजील की सरकारी कृषि अनुसंधान संस्था एम्ब्रापा, ब्राजील की फाजेंडा फ्लोरेस्टा, डेनमार्क और भारत की लीड्स जेनेटिक्स प्राइवेट लिमिटेड, बी.एल. कामधेनु फार्म्स लिमिटेड और लीड्स कनेक्ट सर्विसेज के बीच हुआ। इस सहयोग का लक्ष्य भारत में विश्वस्तरीय कैटल एवं भैंस जीनोमिक्स लैब की स्थापना करना है, जिससे भारतीय पशुधन की नस्लों को वैज्ञानिक रूप से मजबूत किया जा सके।

पशुधन सुधार का नया मॉडल
यह समझौता पशु जीनोमिक्स में भारत और ब्राजील के बीच अब तक का पहला B2G मॉडल सहयोग है। यह पहली बार है जब ब्राज़ील की शीर्ष शोध संस्था एम्ब्रापा किसी भारतीय निजी संगठन के साथ साझेदारी कर रही है। इसका उद्देश्य देसी व विदेशी प्रजातियों में वैज्ञानिक सुधार करना और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाना है।

इस साझेदारी के तहत बोस इंडिकस (देशी गायों), बोस टॉरस (उच्च उत्पादक विदेशी नस्ल) और बबुलस बबैलिस (भैंस) पर उन्नत जीनोमिक शोध किया जाएगा। इससे दूध उत्पादन क्षमता में वृद्धि, प्रजनन दक्षता में सुधार और जलवायु प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है।

उत्तर प्रदेश से शुरू होगा मॉडल
भारत के लिए इस सहयोग का लाभ सबसे पहले उत्तर प्रदेश में दिखेगा, जो देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य है। इस साझेदारी के तहत उन्नत उष्णकटिबंधीय जेनेटिक तकनीक, जलवायु अनुरूप नस्ल विकास और आधुनिक शोध तंत्र लागू किया जाएगा। इससे पशुधन उत्पादकता और वैज्ञानिक क्षमता दोनों मजबूत होंगी।

इस कार्यक्रम का संचालन बरेली स्थित बी.एल. कामधेनु फार्म्स के 10,000 पशुओं वाले आधुनिक डेयरी मॉडल से किया जाएगा। यह फार्म बहु-स्थलीय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें जीनोमिक लैब, IVF केंद्र और किसान नेटवर्क विकसित किए जाएंगे।

वैज्ञानिक और राजनयिक नेतृत्व की सराहना
भारत के ब्राजील स्थित राजदूत दिनेश भाटिया ने कहा, “यह पहल भारत–ब्राजील सहयोग की सर्वश्रेष्ठ भावना का प्रतीक है। विज्ञान, नवाचार और उद्योग की साझेदारी ग्रामीण किसानों के जीवन में बदलाव लाएगी।” एम्ब्रापा की अध्यक्ष सिल्विया मास्रूहा ने कहा कि यह साझेदारी वैज्ञानिक सहयोग के वैश्विक मॉडल की दिशा में कदम है।

लीड्स जेनेटिक्स के निदेशक नवनीत रविकर ने कहा कि यह सहयोग भारत में डेटा-आधारित नस्ल सुधार की दिशा में निर्णायक मोड़ साबित होगा। आने वाले दशक में यह परियोजना वैज्ञानिक प्रजनन प्रणाली, ग्रामीण आजीविका और वैश्विक जेनेटिक नेतृत्व में भारत की स्थिति को मजबूत करेगी।