


उत्तर प्रदेश पुलिस की सशस्त्र इकाई पीएसी के स्थापना दिवस समारोह में इस बार सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा भी साफ दिखाई दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी पीएसी के 78 वर्षों की यात्रा को अनुशासन, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा का जीवंत उदाहरण बताया और जवानों से कहा कि कठिन प्रशिक्षण और पेशेवर दक्षता ही उनकी असली पहचान है।

सीएम ने किया नमन
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने पीएसी द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बल के गौरवशाली इतिहास को नमन किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून का राज ही आज के आत्मविश्वास का आधार है। सुरक्षित माहौल के बिना न सुशासन संभव है और न ही निवेश। निवेश सुरक्षित होगा तभी युवाओं के सपनों को दिशा मिलेगी।

सीएम योगी ने पीएसी की भूमिका को सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं माना। उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, चुनावी ड्यूटी, बड़े त्योहारों की सुरक्षा और संवेदनशील परिस्थितियों में अग्रिम मोर्चे पर खड़ा रहना पीएसी की पहचान बन चुका है। अधिकारी और जवान आज एसएसएफ, एटीएस, एसटीएफ, प्रशिक्षण संस्थानों और यातायात व्यवस्था जैसे कई अहम क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने पीएसी के अदम्य साहस की ऐतिहासिक मिसालें भी याद दिलाईं। संसद पर आतंकी हमले और अयोध्या में हुए आतंकी प्रयासों के दौरान पीएसी जवानों की बहादुरी को उन्होंने बल का गौरव बताया। सरकार द्वारा 46 पीएसी कंपनियों के पुनर्जीवन, आधुनिक हथियारों और दंगा नियंत्रण उपकरणों की उपलब्धता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बल को तकनीक और प्रशिक्षण दोनों स्तर पर मजबूत किया जा रहा है।

नई सोच का परिणाम है ये
भर्ती, पदोन्नति और खेलों में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार जवानों के सम्मान, सुविधाओं और संसाधनों में लगातार वृद्धि कर रही है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में तीन नई महिला पीएसी वाहिनियों का गठन भी इसी सोच का परिणाम है।
पीएसी स्थापना दिवस का यह मंच न सिर्फ बीते गौरव की याद दिलाने वाला रहा, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए बल की भूमिका और जिम्मेदारी को भी स्पष्ट करता नजर आया।












