पीएसी स्थापना दिवस: मुख्यमंत्री योगी ने उत्कृष्ट वाहिनियों, जवानों और मेधावियों को किया सम्मानित, बैंड की प्रस्तुति की सराहना

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी पीएसी के स्थापना दिवस समारोह-2025 को सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सम्मान, प्रेरणा और गर्व के मंच के रूप में प्रस्तुत किया। समारोह के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री ने पीएसी की विभिन्न वाहिनियों, उत्कृष्ट कार्य करने वाले जवानों, खिलाड़ियों, बाढ़ राहत दल, पुलिस मॉडर्न स्कूलों और मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से सराहा।

इनको मिला सम्मान

इस अवसर पर 32वीं वाहिनी पीएसी लखनऊ को उत्तम वाहिनी, 39वीं वाहिनी पीएसी मीरजापुर को अतिउत्तम वाहिनी और 47वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद को सर्वोत्तम वाहिनी का पुरस्कार प्रदान किया गया। ड्रिल और डिमांस्ट्रेशन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 36वीं, 37वीं और 41वीं वाहिनी पीएसी के अधिकारियों और दलों को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।

वहीं बाढ़ राहत कार्यों में उल्लेखनीय योगदान के लिए 36वीं वाहिनी पीएसी वाराणसी को श्रेष्ठ बाढ़ राहत दल घोषित किया गया। व्यक्तिगत स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले जवानों को भी नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

खेलों के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन करने वाले मुख्य आरक्षी किशन कुमार मिश्र को सर्वोत्तम खिलाड़ी का सम्मान मिला, जिन्होंने अखिल भारतीय भारोत्तोलन प्रतियोगिता में तीन स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया।

शिक्षा के क्षेत्र में पहली बार आयोजित पुलिस मॉडर्न स्कूल प्रतियोगिता में मिडिल सेकेंड्री वर्ग में पीएमएस बहराइच और सीनियर सेकेंड्री वर्ग में डॉ. भीमराव आंबेडकर एकेडमी, मुरादाबाद को बेस्ट परफॉर्मेंस ट्रॉफी दी गई। साथ ही इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया।

पीएसी बैंड की हुई तारीफ

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने पीएसी बैंड, मलखंभ, जिम्नास्टिक, वेपन्स ड्रिल और पीटी डिस्प्ले की प्रस्तुतियां देखीं और जवानों की सराहना की। विशेष रूप से वंदे मातरम की धुन पर पीएसी बैंड की प्रस्तुति की तारीफ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गीत आजादी के दौर में युवाओं के लिए प्रेरणा मंत्र था और इसके 150 वर्ष पूर्ण होने पर पीएसी द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रभक्ति जगाने की पहल सराहनीय है।

पूरा समारोह पीएसी के अनुशासन, समर्पण और बहुआयामी योगदान का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।