हत्याकांड के बाद से था फरार
सिराज अहमद, जो मूल रूप से सुल्तानपुर का निवासी था, सुल्तानपुर हत्या कांड के बाद से पुलिस की पकड़ से बाहर था। पुलिस की टीम को लंबे समय से उसकी तलाश थी और उसके सिर पर इनाम भी घोषित था। STF को इस मामले में अहम जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर सिराज की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई की गई।
खुफिया जानकारी के आधार पर STF को पता चला कि सिराज पंजाब-हरियाणा बॉर्डर से सहारनपुर के गंगोह क्षेत्र में किसी वारदात को अंजाम देने आया था। STF ने घेराबंदी की, लेकिन सिराज ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।
मुठभेड़ के बाद STF ने सिराज के पास से 30 बोर और 32 बोर की पिस्टल, कारतूस, मोबाइल फोन, वाई-फाई डोंगल और अन्य दस्तावेज बरामद किए। सिराज अहमद पर हत्या, हत्या के प्रयास और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून जैसे गंभीर मामलों में दर्जनों मुकदमे थे। वह लंबे समय से उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लिए एक बड़ा सुरक्षा खतरा बना हुआ था।
मुख्तार अंसारी का था करीबी
सिराज अहमद मुख्तार अंसारी के करीबी और वह डी-68 गैंग का प्रमुख सदस्य था। उसके खिलाफ जिला प्रशासन ने उसकी संपत्ति और गाड़ियों को पहले ही कुर्क कर लिया था। STF की इस सफलता से राज्य में अपराध के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है।












