हनुमानगढ़ में किसानों की महापंचायत : ईथेनॉल प्लांट रद्द करने की मांग, प्रदूषण और भूजल संकट का डर

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हनुमानगढ़ में प्रस्तावित ईथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ किसान महापंचायत में किसान नेता राकेश टिकैत पहुंचे।

हनुमानगढ़ में प्रस्तावित ईथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ किसान महापंचायत में किसान नेता राकेश टिकैत पहुंचे।
– फोटो : गांव जंक्शन

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राजस्थान के हनुमानगढ़ के टिब्बी क्षेत्र के राठीखेड़ा में प्रस्तावित ईथेनॉल प्लांट के खिलाफ किसानों ने बुधवार को महापंचायत आयोजित की गई है। महापंचायत में किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत पहुंच चुके हैं। पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के कई जिलों से बड़ी संख्या में किसान महापंचायत में पहुंचे हैं। किसानों की इस महापंचायत में ईथेनॉल फैक्ट्री पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। भूजल और पर्यावरण प्रदूषण से आशंकित किसान
किसानों का आरोप है कि यह परियोजना प्रदूषण फैलाएगी और इलाके के भूजल को नुकसान पहुंचाएगी। स्थानीय कांग्रेस नेताओं के समर्थन से आयोजित इस महापंचायत में किसानों ने साफ कहा कि वे किसी भी कीमत पर इस परियोजना को इलाके में नहीं लगने देंगे। किसानों का आरोप है कि चंडीगढ़ की एक कंपनी द्वारा प्रस्तावित ईथेनॉल फैक्ट्री से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचेगा और इससे भूजल प्रदूषित होने का खतरा है।

हनुमानगढ़ जंक्शन की धान मंडी में जुटे किसान
महापंचायत का समय दोपहर 12 बजे निर्धारित था, लेकिन इससे पहले ही किसान हनुमानगढ़ जंक्शन की धान मंडी में जुटने लगे थे। महापंचायत को देखते हुए धान मंडी में व्यापारियों ने कल अनाज की बिक्री नहीं करने का निर्णय लिया है।मंच से लगातार यह एलान किया जा रहा है कि यदि कहीं पुलिस द्वारा किसानों को रोका गया या कोई बाधा डाली गई तो इसकी सूचना तुरंत संघर्ष समिति को दी जाए। प्रशासन की ओर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है, हालांकि किसानों को मंडी में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।

जांच समिति गठित, सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
इस बीच, राज्य के वन एवं पर्यावरण विभाग ने प्रस्तावित ईथेनॉल प्लांट से संभावित प्रदूषण और भूजल पर असर की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता बीकानेर संभागीय आयुक्त करेंगे, जबकि वन एवं पर्यावरण विभाग के विशेष सचिव सदस्य सचिव होंगे। समिति में हनुमानगढ़ जिला कलेक्टर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता और भूजल विभाग के मुख्य अभियंता भी शामिल हैं। समिति अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।

एमओयू रद्द करने और मामलों की वापसी की मांग
महापंचायत में शामिल किसानों ने ईथेनॉल प्लांट के लिए किए गए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को तत्काल रद्द करने की मांग की। इसके साथ ही, उन्होंने टिब्बी में हुए टकराव के दौरान किसानों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की है।

कड़े सुरक्षा इंतजाम, इंटरनेट सेवाएं बंद
महापंचायत को देखते हुए जिला प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। पूरे जिले में धारा 163 लागू है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जगह-जगह बैरिकेट्स लगाए गए हैं और करीब 1500 पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है। धान मंडी के मुख्य द्वार को छोड़कर सभी गेट बंद कर दिए गए, जबकि क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं। पुलिस वाहन लगातार गश्त करते रहे ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। पुलिस मुख्यालय से भी अतिरिक्त बल बुलाया गया है।

महापंचायत में ट्रैक्टरों के प्रवेश पर पाबंदी
कलेक्टर खुशाल यादव ने महापंचायत में ट्रैक्टरों के प्रवेश पर पाबंदी लगाई है। जिला कलेक्टर का कहना है कि बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के पहुंचने से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है, जबकि किसानों ने साफ कर दिया है कि वे ट्रैक्टरों के साथ ही महापंचायत में शामिल होंगे। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि ट्रैक्टरों को रोका गया तो वे चक्का जाम करेंगे।

करीब 20 हजार किसानों के जुटने का अनुमान
हनुमानगढ़ के टिब्बी में प्रस्तावित ईथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में आयोजित इस महापंचायत में करीब 20 हजार किसानों के जुटने का अनुमान लगाया जा रहा है। किसानों ने पहले कलेक्ट्रेट पर महापंचायत करने का ऐलान किया था, लेकिन प्रशासन से हुई बातचीत के बाद उन्होंने स्थान बदलकर धान मंडी में महापंचायत आयोजित करने पर सहमति जताई, हालांकि फैसले में कोई बदलाव नहीं किया।

किसान संगठनों ने गांव-गांव जाकर किया संपर्क
महापंचायत को सफल बनाने के लिए किसान संगठन कई दिनों से गांव-गांव जाकर संपर्क कर रहे हैं और बड़ी संख्या में किसानों से पहुंचने की अपील कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग ईथेनॉल फैक्ट्री को हटाने की है और वे महापंचायत को शांतिपूर्ण रखना चाहते हैं, लेकिन किसी भी तरह की प्रशासनिक बाधा की स्थिति में वे अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे। साथ ही, 10 दिसंबर को टिब्बी में हुई हिंसक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए संयम और शांति बनाए रखने की अपील भी की गई है।

जुलाई से चल रहा है ईथेनॉल प्लांट का विरोध
ईथेनॉल प्लांट के खिलाफ किसानों का विरोध जुलाई महीने से लगातार जारी है। यह आंदोलन तब और तेज हुआ, जब कंपनी ने फैक्ट्री की चारदीवारी का निर्माण शुरू किया। 10 दिसंबर को किसानों ने टिब्बी के एसडीएम कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया था। टिब्बी में ईथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ आगे की रणनीति तय करने के लिए एसडीएम कार्यालय के सामने महापंचायत हुई थी, जिसमें बड़ी संख्या में किसान और स्थानीय लोग शामिल हुए।

पंचायत के बाद किसानों ने फैक्ट्री की ओर कूच किया, लेकिन रास्ते में पुलिस द्वारा रोके जाने पर स्थिति बिगड़ गई और बैरिकेड तोड़कर किसान आगे बढ़ गए। शाम होते-होते सैकड़ों किसान ट्रैक्टरों के साथ फैक्ट्री स्थल पर पहुंच गए थे, जहां चारदीवारी को तोड़ दिया गया और पुलिस के साथ झड़प की स्थिति बन गई।

इस दौरान फैक्ट्री परिसर में खड़ी कई गाड़ियों को आग लगा दी गई और ट्रैक्टरों से फैक्ट्री की दीवार भी तोड़ी गई। इस हिंसक झड़प में पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हुए, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 100 से अधिक लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए और करीब 40 लोगों को हिरासत में लिया।