उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने राज्य के सभी जिला पुलिस प्रमुखों को एक महत्वपूर्ण सर्कुलर जारी किया है। इस सर्कुलर में निर्देश दिए गए हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में सरकारी वकीलों को जमानत और अन्य आपराधिक मामलों से संबंधित सभी निर्देश अब इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजे जाएं।
इसलिए उठाया गया कदम
यह कदम इलाहाबाद हाईकोर्ट के 9 दिसंबर के आदेश के बाद लिया गया है, जिसमें कहा गया था कि मौजूदा मैनुअल प्रणाली के तहत पुलिस थानों से कोर्ट तक जरूरी निर्देश पहुंचने में काफी समय लगता है, जिससे आपराधिक मामलों में देरी होती है।
हाईकोर्ट की बेंच ने यह टिप्पणी की थी कि जमानत जैसे मामलों से किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता जुड़ी होती है, और ऐसे मामलों में देरी और मैनुअल प्रक्रिया से पुलिसकर्मियों का समय और जनता के पैसे की बर्बादी होती है। इस निर्देश के बाद, अब सरकारी वकील को जो निर्देश भेजे जाते हैं, उन्हें इलेक्ट्रॉनिक रूप में भेजा जाएगा, जिससे प्रक्रिया तेज होगी और समय की बचत होगी।
जारी हुआ सर्कुलर
इस नए सर्कुलर के तहत, जिला पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि जमानत और अन्य आपराधिक मामलों से जुड़े सभी दस्तावेज अब पैरोकार के जरिए भेजने के बजाय सीधे हाईकोर्ट की आधिकारिक ईमेल आईडी पर भेजे जाएंगे।
इसके साथ ही, इस कदम को लागू करने के लिए उच्च न्यायालय और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के अधिकारियों ने भी योगदान दिया है, जिनकी मदद से इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) को लागू किया गया है। इस सुधारात्मक कदम के जरिए, उत्तर प्रदेश में न्यायिक प्रक्रिया को और भी पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है।












