ये है मामला
हाल में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आयु सीमा में तीन साल की छूट की मांग को लेकर ज्ञापन देने आयोग कार्यालय पहुंचे थे। अभ्यर्थियों की भीड़ और उनके आक्रोश को देखते हुए प्रशांत कुमार खुद कार्यालय से बाहर आए और शांतिपूर्वक उनकी बात सुनी। इस दौरान अभ्यर्थियों ने बताया कि सामान्य वर्ग के लिए 18 से 22 वर्ष की आयु सीमा न केवल बेहद कम है बल्कि वर्षों से तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के साथ अन्याय भी है।
अभ्यर्थियों ने कहा कि 2019 के बाद सिर्फ 2023 में ही एक बार कांस्टेबल भर्ती का मौका मिला, जिससे बड़ी संख्या में उम्मीदवार अब ओवरएज हो चुके हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछली 60 हजार कांस्टेबल भर्ती में आयु सीमा में छूट दी गई थी और 2025 में निकली यूपी पुलिस एसआई भर्ती में भी तीन साल की छूट दी जा चुकी है।
सुनी अभ्यर्थियों की मांग
प्रशांत कुमार ने अभ्यर्थियों की बात ध्यान से सुनते हुए उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित विभाग तक उनकी समस्याएं पहुंचाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार और आयोग युवाओं के भविष्य के प्रति संवेदनशील हैं और हर संभव प्रयास किया जाएगा कि न्यायसंगत समाधान निकले।
अभ्यर्थियों के बीच जाकर संवाद करने की इस पहल से माहौल काफी हद तक शांत हुआ। छात्रों ने भी प्रशांत कुमार के इस कदम की सराहना की और उम्मीद जताई कि उनकी वर्षों की मेहनत बेकार नहीं जाएगी। यह घटनाक्रम एक बार फिर साबित करता है कि प्रशासनिक संवेदनशीलता ही विश्वास की सबसे बड़ी नींव होती है।












