Maharashtra: सांगली में खुलेगा समर्पित किशमिश अनुसंधान केंद्र, किसानों और निर्यातकों को मिलेगा बड़ा सहारा

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किशमिश – फोटो : सोशल मीडिया

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महाराष्ट्र के सांगली जिले, जो देश में अंगूर और किशमिश उत्पादन का प्रमुख केंद्र माना जाता है, में जल्द ही एक डेडिकेटेड रेज़िन (किशमिश) रिसर्च सेंटर की स्थापना की जाएगी। यह केंद्र किशमिश उत्पादन से जुड़े अनुसंधान, गुणवत्ता सुधार, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को मजबूत करने पर काम करेगा।

इस प्रस्ताव को हाल ही में शिवाजी विश्वविद्यालय, कोल्हापुर की सीनेट की बैठक में मंजूरी दी गई। सांगली से विधायक सुधीर गाडगिल द्वारा उठाई गई मांग के बाद सीनेट ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया, जिससे विश्वविद्यालय के अधीन इस केंद्र की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है।

अनुसंधान की कमी होगी दूर
विधायक सुधीर गाडगिल ने कहा कि सांगली देश के अग्रणी अंगूर और किशमिश उत्पादक जिलों में शामिल है, इसके बावजूद महाराष्ट्र में अब तक कोई विशेषीकृत किशमिश अनुसंधान केंद्र नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में अंगूर प्रोसेसिंग से जुड़ी कई इकाइयां मौजूद हैं, लेकिन किसानों और प्रोसेसरों को वैज्ञानिक शोध और तकनीकी मार्गदर्शन के लिए किसी समर्पित संस्थान का सहारा नहीं मिल पाता। उनका कहना था कि किशमिश उत्पादन को टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, नई तकनीकों और कौशल विकास की सख्त जरूरत है।

किसानों और प्रोसेसरों को मिलेगा सहारा
चूंकि सांगली जिला शिवाजी विश्वविद्यालय के कार्यक्षेत्र में आता है, इसलिए गाडगिल ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय यहां किशमिश अनुसंधान एवं कौशल प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना करे। उन्होंने कहा कि सांगली और आसपास के इलाकों में उत्पादित किशमिश उच्च गुणवत्ता की होती है और घरेलू व निर्यात बाजारों में इसकी मजबूत मांग है। हालांकि, उत्पादकों को अब तक अनुसंधान एवं विकास (R&D) से जुड़ा कोई संगठित समर्थन नहीं मिल पाया है, जिससे उत्पादकता और गुणवत्ता में और सुधार किया जा सके।

निर्यात प्रतिस्पर्धा में मिलेगी मजबूती
किशमिश उत्पादक लंबे समय से इस तरह के केंद्र की मांग कर रहे थे। खासकर निर्यात बाजारों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और चीन सहित अन्य देशों से आयातित किशमिश की बढ़ती मौजूदगी ने घरेलू उत्पादकों की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। उत्पादकों का मानना है कि अनुसंधान केंद्र की मदद से उत्पादन तकनीक, गुणवत्ता मानक, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग में सुधार होगा, जिससे भारतीय किशमिश वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगी।

चरणबद्ध तरीके से होगी शुरुआत
शिवाजी विश्वविद्यालय ने फैसला किया है कि शुरुआती चरण में इस केंद्र को अस्थायी स्थान से संचालित किया जाएगा। बाद में आवश्यक संसाधन उपलब्ध होने पर इसे स्थायी परिसर में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके साथ ही केंद्र के संचालन के लिए जरूरी मानव संसाधन और स्टाफ की नियुक्ति भी चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।