एवोकैडो की खेती : विदेशी फल से किसानों की कमाई का नया रास्ता, मैदानी इलाकों में भी संभव

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एवोकैडो की खेती

एवोकैडो की खेती
– फोटो : गांव जंक्शन

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भारत में अब खेती सिर्फ परंपरागत फसलों तक सीमित नहीं रह गई है। बदलती खान-पान की आदतों और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता ने विदेशी फलों की मांग को तेजी से बढ़ाया है। इन्हीं फलों में से एक है एवोकैडो, जिसे ‘सुपरफूड’ भी कहा जाता है। आज एवोकैडो की खेती करके किसान प्रति एकड़ 8 से 10 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं। खास बात यह है कि यह खेती सिर्फ पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब मैदानी और गर्म इलाकों में भी सफलतापूर्वक की जा रही है।

एवोकैडो की खेती क्यों है फायदेमंद?
एवोकैडो में स्वस्थ वसा, विटामिन और खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है और वजन घटाने में भी मदद करता है। बड़े शहरों में इसकी भारी मांग है और इसका उपयोग सलाद, आइसक्रीम, जूस और सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है। बाजार में एवोकैडो 300 से 400 रुपये प्रति किलो तक बिकता है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है।

मैदानी इलाकों में भी सफल खेती
पहले एवोकैडो को सिर्फ पहाड़ी फल माना जाता था, लेकिन अब ‘हस’ (Hass) किस्म मैदानी इलाकों के लिए सबसे उपयुक्त मानी जा रही है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु के किसान इसकी खेती से अच्छा लाभ कमा रहे हैं। कोयंबटूर जैसे गर्म क्षेत्रों में भी सही तकनीक अपनाकर इसकी खेती संभव है।

खेती की सही तकनीक
कृषि विशेषज्ञ कहते हैं कि एवोकैडो के पौधे 20×20 फीट की दूरी पर लगाने चाहिए। बेहतर उत्पादन के लिए ड्रिप सिंचाई अपनाना जरूरी है। शुरुआती दो वर्षों तक पौधों को तेज धूप से बचाने के लिए छाया देना लाभकारी रहता है। एक बार पौधे फल देने लगें तो 40–50 वर्षों तक उत्पादन मिलता है, जिससे यह दीर्घकालीन निवेश साबित होता है।