लखनऊ में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली ने 6 साल पूरे किए, DGP ने अफसरों को किया सम्मानित

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लखनऊ में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली अपने सफलतम 6 साल पूरे कह रही है, जिससे प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था में कई सकारात्मक बदलाव आए हैं। 13 जनवरी 2020 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों लागू की गई इस प्रणाली ने शहर की सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। इसी के चलते रिजर्व पुलिस लाइन, महानगर में आयोजित एक भव्य समारोह में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उपस्थिति दर्ज कराई

जानकारी के मुताबिक, इस अवसर पर 150 पुलिसकर्मियों को उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मानित किया गया। इनमें महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, और साइबर अपराध नियंत्रण में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पुलिसकर्मी शामिल थे। डीजीपी ने स्वयं 19 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर उनका उत्साहवर्धन किया।

ये हैं आंकड़े

सुरक्षा व्यवस्था के सुधार के कारण, साल 2025 में लखनऊ में डकैती की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई। इसके साथ ही महिला अपराधों में 20% की कमी आई, जो ‘सेफ सिटी’ और ‘मिशन शक्ति’ जैसी योजनाओं की सफलता को दर्शाता है।

2025 में महिला एवं अल्पवयस्क अपराधों में 139 अपराधियों को सजा मिली, जिनमें 1 को मृत्युदंड और 46 को आजीवन कारावास की सजा मिली। पुलिस ने हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित कर, तकनीकी अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया है। साल 2025 में यूपी-112 द्वारा महिलाओं से संबंधित 80,700 से अधिक शिकायतों पर औसतन 8 मिनट के रिस्पांस टाइम में सहायता पहुंचाई गई।

पुलिस महानिदेशक ने अपने संबोधन में स्मार्ट और संवेदनशील पुलिसिंग की बात की, जिसमें तकनीकी उपायों के साथ-साथ पुलिस अधिकारियों की संवेदनशीलता भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगामी समय में साइबर ठगी से निपटने के लिए उप-निरीक्षकों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया।

लगातार कम हो रहे अपराध

साल 2024 के मुकाबले 2025 में अपराधों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है, और पुलिस की सक्रियता को देखते हुए लखनऊ अब सुरक्षित शहरों की सूची में शामिल होता जा रहा है।