RICE TRADE: वर्ष 2026 में भी कमजोर रह सकती हैं चावल की वैश्विक कीमतें, मजबूत आपूर्ति से किसानों की बढ़ी चिंता

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एशिया दुनिया का करीब 90 प्रतिशत चावल पैदा करता है, और यहीं के किसानों पर कीमतों में गिरावट का सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है।

एशिया दुनिया का करीब 90 प्रतिशत चावल पैदा करता है, और यहीं के किसानों पर कीमतों में गिरावट का सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है।
– फोटो : एजेंसी

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वैश्विक बाजार में चावल की कीमतें वर्ष 2026 में भी कमजोर बनी रह सकती हैं। इसकी बड़ी वजह भारत, थाईलैंड और वियतनाम जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में अतिरिक्त आपूर्ति को बताया जा रहा है। बाजार के जानकारों का कहना है कि खरीदार इस स्थिति को समझते हुए खरीदारी टाल रहे हैं, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ रहा है।ज्यादा उत्पादन, लेकिन कम दाम
एशिया दुनिया का करीब 90 प्रतिशत चावल पैदा करता है, और यहीं के किसानों पर कीमतों में गिरावट का सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, अफ्रीका और अन्य गरीब देशों के उपभोक्ताओं को सस्ता चावल राहत देगा, लेकिन किसानों की पहले से सीमित आय और सिमट सकती है।

खरीदार इंतजार में, निर्यातक बेचने को मजबूर
ओलाम एग्री इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नितिन गुप्ता का कहना है, “भारत, थाईलैंड और वियतनाम जैसे बड़े निर्यातकों के पास सरप्लस स्टॉक है। खरीदार यह जानते हैं और खरीदारी रोककर वे विक्रेताओं का धैर्य परख रहे हैं।”

भारतीय चावल के दाम और गिरने की आशंका
गुप्ता के मुताबिक, मार्च तक भारतीय चावल की कीमतें 15 से 25 डॉलर प्रति टन तक गिर सकती हैं, क्योंकि नई फसल की आवक बढ़ने वाली है और उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर रहने का अनुमान है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है और वैश्विक निर्यात में उसकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। फिलहाल भारत 5% टूटे उबले (पारबॉयल्ड) चावल को 355–360 डॉलर प्रति टन, और 5% टूटे सफेद चावल को 350–355 डॉलर प्रति टन पर पेश कर रहा है।

गोदामों में रिकॉर्ड भंडार
नई फसल के साथ-साथ पिछली सीजन का स्टॉक भी बाजार पर दबाव बना रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर की शुरुआत तक सरकारी गोदामों में चावल का भंडार 57.57 मिलियन टन पहुंच गया, जो एक साल पहले की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत ज्यादा है। यह बढ़ोतरी नई धान खरीद तेज होने से हुई है।

थाईलैंड और वियतनाम से सस्ता भारतीय चावल
आदित्य बिड़ला ग्लोबल ट्रेडिंग के नीरज कुमार के मुताबिक, ज्यादा स्टॉक की वजह से भारतीय चावल की कीमतें अब थाईलैंड और वियतनाम से भी नीचे आ गई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है।

वैश्विक उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) का अनुमान है कि 2025-26 में वैश्विक चावल उत्पादन 556.4 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल से 1.2 प्रतिशत ज्यादा होगा।

आयातक देशों की सख्ती बढ़ी
छत्तीसगढ़ राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश जैन के अनुसार, इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे बड़े आयातक देशों ने हाल में चावल आयात पर पाबंदियां लगाई हैं। इससे निर्यातक देशों के बीच बाकी बाजारों के लिए प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है।

किसानों के लिए क्या मायने?

  • रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद कम कीमतों से घट सकती है किसानों की आय 
  • सरकारी खरीद और भंडारण से बाजार में बढ़ सकता है दबाव 
  • निर्यात बढ़ाने की कोशिश, लेकिन वैश्विक मांग कमजोर 
  • नीतिगत समर्थन और मूल्य स्थिरीकरण की जरूरत