ये है मामला
पुलिस अधिकारियों ने शंकराचार्य से अनुरोध किया कि वे रथ से उतरकर पैदल ही संगम तक जाएं, ताकि भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके। हालांकि यह आग्रह उनके समर्थकों को नागवार गुजरा। समर्थकों का तर्क था कि शंकराचार्य एक प्रतिष्ठित संत हैं और उनके लिए समुचित व्यवस्था और सुरक्षा पहले से सुनिश्चित होनी चाहिए थी। इसी बात को लेकर मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों और समर्थकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
देखते ही देखते बहस धक्का-मुक्की में बदल गई। समर्थकों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, जबकि पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिससे वहां मौजूद अन्य श्रद्धालुओं को भी असुविधा हुई।
इसलिए उठाया गया कदम
जानकारी के अनुसार, पुलिस प्रशासन का कहना है कि उनकी प्राथमिकता श्रद्धालुओं की जान-माल की सुरक्षा है और भीड़ प्रबंधन के तहत यह कदम उठाया गया। पुलिस प्रशासन ने मौनी अमावस्या के चलते प्रयागराज के चप्पे चप्पे पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।












