
उर्वरक
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भारतीय माइक्रो-फर्टिलाइज़र निर्माता संघ (Indian Micro-Fertilizers Manufacturers Association) ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertiliser Control Order-FCO) के तहत अधिसूचित सभी उर्वरकों पर समान रूप से 5 प्रतिशत जीएसटी लागू किया जाए। इसके साथ ही, उद्योग ने अतिरिक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट के शीघ्र रिफंड और एकीकृत लाइसेंस प्रणाली लागू करने की मांग भी की है।संघ ने जीएसटी 2.0 को इस क्षेत्र के लिए एक “ऐतिहासिक सुधार” बताते हुए कहा कि शेड्यूल-1G के अंतर्गत आने वाले माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स और उनके मिश्रणों पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया जाना एक बड़ा सकारात्मक कदम है। हालांकि, इसके बाद कुछ इनपुट्स पर उलटी कर संरचना (Inverted Duty Structure) की समस्या सामने आई है।
वर्किंग कैपिटल पर दबाव
संघ के अध्यक्ष और एरीज एग्रो लिमिटेड के चेयरमैन राहुल मिर्चंदानी के अनुसार, कई कच्चे माल और सेवाओं पर जीएसटी दरें तैयार उत्पादों से अधिक हैं। इससे इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा होता जा रहा है, जिससे कंपनियों की कार्यशील पूंजी फंसी रहती है। उन्होंने कहा, “इस स्थिति में निर्माताओं का पैसा लंबे समय तक अटका रहता है, जिससे नकदी प्रवाह प्रभावित होता है और उत्पादन, गुणवत्ता सुधार व किसान-आधारित गतिविधियों में निवेश सीमित हो जाता है।”
तेज और समयबद्ध रिफंड की मांग
संघ ने अतिरिक्त जीएसटी क्रेडिट के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध रिफंड तंत्र लागू करने की मांग की है। उद्योग का कहना है कि उर्वरक जैसे मूल्य-संवेदनशील और विनियमित क्षेत्र में तेज रिफंड से कंपनियों पर वित्तीय दबाव कम होगा और वे किसानों तक बेहतर उत्पाद पहुंचा सकेंगी। मिर्चंदानी के अनुसार, “तेज़ रिफंड से कार्यशील पूंजी की समस्या कम होगी और उद्योग गुणवत्ता, क्षमता विस्तार और किसान संपर्क कार्यक्रमों में अधिक निवेश कर सकेगा।”
सभी उर्वरकों पर समान 5% जीएसटी की पैरवी
उद्योग संगठन ने यह भी जोर दिया कि एफसीओ के तहत अधिसूचित सभी प्रकार के उर्वरकों पर एक समान 5 प्रतिशत जीएसटी लागू किया जाए। इससे कर वर्गीकरण को लेकर होने वाले विवाद खत्म होंगे, प्रतिस्पर्धा का समान माहौल बनेगा और बिना कर असंतुलन के नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ की जरूरत
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ाने के लिए संघ ने ‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया है। इसके तहत सभी लाइसेंस से जुड़े दस्तावेजों का एक केंद्रीय डिजिटल भंडार बनाने का प्रस्ताव है, जिसे सभी राज्य सरकारें एक्सेस कर सकें।
संघ का कहना है कि वर्तमान में राज्य-स्तरीय और कई मामलों में जिला-स्तरीय लाइसेंसिंग के कारण दोहराव, देरी और अनावश्यक अनुपालन लागत बढ़ जाती है। इस व्यवस्था को सरल बनाने से न केवल उद्योग को राहत मिलेगी, बल्कि किसानों तक गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तेजी से पहुंच सकेंगे।




