किसानों को सलाह : कड़ाके की ठंड और कोहरा से फसलों की करें सुरक्षा, अगेती खेती से बचें

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रबी फसल

रबी फसल
– फोटो : सोशल मीडिया

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पहाड़ों पर हुई बर्फबारी ने मैदानी इलाकों में तापमान गिरा दिया है। बढ़ती ठंड, शीतलहर, कोहरा और पाले ने किसानों को चिंतित कर दिया है। तापमान लगातार गिर रहा है और सुबह-शाम की ठिठुरन खेतों में साफ दिखाई दे रही है। ऐसे मौसम की गंभीरता को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को अगले दो सप्ताह के लिए खेती संबंधी महत्वपूर्ण सलाह दी है, ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके और उत्पादन प्रभावित न हो।अगेती खेती पर रोक
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि जनवरी की इस तेज ठंड में अगेती खेती की शुरुआत फिलहाल टालना ही बेहतर है। जो किसान अगेती सब्जी या अन्य फसलों की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें सलाह दी गई है कि वे थोड़ी प्रतीक्षा करें और फरवरी में ही अगेती खेती शुरू करें। इससे ठंड और पाले से होने वाले नुकसान से बचा जा सकेगा।

रबी फसलों के लिए विशेष निर्देश
गेहूं की बुवाई अब केवल देर से बोई जाने वाली किस्मों तक सीमित है। किसानों को 15 जनवरी तक ही गेहूं की बुवाई पूरी कर लेनी चाहिए और वही किस्में बोनी चाहिए जो उनके क्षेत्र के लिए उपयुक्त हों। जिन खेतों में गेहूं पहले ही बोया जा चुका है, वहां 20-25 दिन के अंतर पर सिंचाई करते रहें और समय-समय पर पोटाश का छिड़काव करें। ध्यान रखें कि अत्यधिक पानी देने से ठंड में फसल को नुकसान भी हो सकता है।

आलू और मटर की फसल में सावधानी
आलू की फसल में इस मौसम में झुलसा रोग का खतरा सबसे अधिक रहता है। शुरुआती लक्षण दिखते ही फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करें। रोग का असर अधिक होने पर 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव आवश्यक है। मटर की फसल में फूल आने का समय संवेदनशील होता है। इस दौरान सिंचाई अवश्य करें। कोहरे और अधिक नमी के कारण सफेद चूर्ण रोग और डाउनी मिल्ड्यू का खतरा बढ़ जाता है। समय पर दवा का छिड़काव करना जरूरी है। फलियां बनने पर हल्की दूसरी सिंचाई करने से उत्पादन बेहतर होता है।

टमाटर और मिर्च की फसल के लिए निर्देश
टमाटर और मिर्च की फसलों को झुलसा रोग से बचाने के लिए फफूंदनाशक दवाओं का प्रयोग करें। कीटों से बचाव के लिए नीम आधारित या जैविक कीटनाशक का उपयोग लाभकारी रहेगा। आम के बागों में बौर बढ़ाने के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों का घोल बनाकर छिड़काव करें।