
गन्ने की खेती
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गन्ने की खेती किसानों के लिए मुनाफे का मजबूत जरिया मानी जाती है। आगे किसान सही समय पर बुवाई, उन्नत किस्मों का चयन और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाएं तो वो इस मुनाफे को और बढ़ा सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गन्ने की खेती में थोड़ी समझदारी और सही प्रबंधन किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है और प्रति एकड़ अच्छी पैदावार, बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे… अबसे अहम- सही समय और मिट्टी का चयन
गन्ने की बुवाई के लिए शरदकालीन (अक्टूबर-नवंबर) और बसंतकालीन (फरवरी-मार्च) मौसम उपयुक्त माने जाते हैं। शरदकालीन बुवाई से आमतौर पर अधिक पैदावार मिलती है। गन्ने के लिए जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे बेहतर रहती है, जिससे जड़ों का विकास अच्छा होता है।
उन्नत किस्मों से बढ़ेगी पैदावार
विशेषज्ञों के अनुसार अधिक मुनाफे के लिए सही किस्म का चयन जरूरी है। वर्तमान में Co 0238, Co 0118 और Co 15023 जैसी किस्में किसानों के बीच लोकप्रिय हैं। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में Co 0238 में लाल सड़न रोग की समस्या देखी गई है, इसलिए क्षेत्र के अनुसार किस्म का चुनाव करना चाहिए।
ट्रेंच विधि से करें खेती
पारंपरिक विधि के बजाय ट्रेंच विधि अपनाने से गन्ने की मोटाई और वजन में बढ़ोतरी होती है। इस विधि में पंक्तियों के बीच 4 से 5 फीट की दूरी रखी जाती है, जिससे पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है।
बीज उपचार से बीमारियों से बचाव
गन्ने में लगने वाली बीमारियों, विशेषकर लाल सड़न रोग से बचाव के लिए बीज उपचार जरूरी है। बुवाई से पहले गन्ने के टुकड़ों को कार्बेन्डाजिम या अन्य अनुशंसित फफूंदनाशक के घोल में 15-20 मिनट तक डुबोकर रखना लाभकारी माना जाता है।
खाद और उर्वरक का संतुलित उपयोग
गन्ने की फसल पोषण की मांग अधिक करती है। बुवाई के समय सड़ी हुई गोबर खाद डालना जरूरी है। इसके साथ ही मिट्टी परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करें। जिंक और सल्फर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व गन्ने की गुणवत्ता और चीनी की मात्रा बढ़ाने में सहायक होते हैं।
सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण
गन्ने की फसल को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है, खासकर गर्मी के मौसम में। हालांकि, खेत में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। समय-समय पर निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण से फसल को पूरा पोषण मिलता है।
सह-फसली खेती से बढ़ेगा फायदा
गन्ने के साथ सह-फसली खेती अपनाकर किसान अतिरिक्त आमदनी कर सकते हैं। गन्ने की पंक्तियों के बीच दालें या सब्जियां उगाकर खाद और सिंचाई का खर्च भी निकाला जा सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान अपनी मिट्टी और जलवायु के अनुसार स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से मार्गदर्शन लेकर खेती करें, ताकि जोखिम कम हो और मुनाफा अधिक मिले।




