
ऑयल पाम की खेती
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छत्तीसगढ़ में नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम योजना के तहत ऑयल पाम की खेती करने वाले किसानों को केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार की ओर से भी अतिरिक्त टॉप-अप अनुदान दिया जा रहा है। मुंगेली के सहायक संचालक उद्यानिकी के अनुसार, ऑयल पाम की खेती में शुरुआती लागत अधिक होती है और फसल को उत्पादन में आने में लगभग 3 से 4 वर्ष लगते हैं। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने किसानों के लिए विशेष आर्थिक सहायता का प्रावधान किया है।केंद्र सरकार द्वारा प्रति हेक्टेयर न्यूनतम 1.30 लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा राज्य सरकार विभिन्न मदों में अतिरिक्त सहायता प्रदान कर रही है, जिससे किसानों पर शुरुआती निवेश का बोझ कम हो सके। ऑयल पाम को एक दीर्घकालीन, कम श्रम वाली और अधिक उत्पादन देने वाली फसल माना जाता है। रोपण के चौथे वर्ष से इसका उत्पादन शुरू हो जाता है और यह फसल 25 से 30 वर्षों तक लगातार उपज देती है।
पारंपरिक तिलहन फसलों की तुलना में ऑयल पाम प्रति हेक्टेयर 4 से 6 गुना अधिक तेल उत्पादन क्षमता रखता है, जिससे किसानों को लंबे समय तक स्थायी आय मिलती है। राज्य सरकार द्वारा रखरखाव मद में 6,750 रुपये प्रति हेक्टेयर, अंतरवर्तीय फसलों के लिए 10,250 रुपये प्रति हेक्टेयर, ड्रिप सिंचाई के लिए कुल 22,765 रुपये प्रति हेक्टेयर और फेंसिंग के लिए 54,485 रुपये प्रति हेक्टेयर तक का अनुदान दिया जा रहा है।
इस प्रकार कुल मिलाकर किसानों को 69,620 रुपये प्रति हेक्टेयर तक की अतिरिक्त सहायता मिल सकती है। यह लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जो योजना के तहत ऑयल पाम का रोपण करेंगे। पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और तकनीकी जानकारी के लिए किसान उद्यानिकी विभाग या अधिकृत प्रतिनिधि कंपनियों से संपर्क कर सकते हैं।




