ऐसे खुली पोल
पुलिस जांच में सामने आया है कि इरशाद खां का संबंध उस गिरोह से था, जो जिम की आड़ में युवतियों को अपने जाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करता था। बताया जा रहा है कि आरोपी न सिर्फ अन्य अभियुक्तों के संपर्क में था, बल्कि उन्हें संरक्षण और जानकारी भी उपलब्ध कराता था। मोबाइल फोन की जांच में ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनसे उसकी भूमिका संदिग्ध नहीं बल्कि सक्रिय नजर आ रही है।
पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा के अनुसार, इस केस में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद हेड कांस्टेबल की संलिप्तता उजागर हुई। मुख्य आरोपी फरीद की गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों के भीतर इरशाद खां को भी दबोच लिया गया। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नेटवर्क को मजबूत करने में मदद की।
यह मामला तब सामने आया, जब कोतवाली देहात में दो पीड़ित युवतियों ने शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम में दोस्ती के बाद उन्हें बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन की कोशिश की गई। जांच के दौरान शहर के कई जिमों की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिन्हें सील कर दिया गया है।
हो रही जांच
एक पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी से विभाग की छवि पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इसमें और कौन-कौन शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि दोषी चाहे किसी भी पद पर हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।












