
आम बागवानों के लिए जनवरी-फरवरी का महीना काफी अहम होता है।
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जनवरी का आखिरी हफ्ता और फरवरी के महीने में आम के बागों में कीट-रोग के प्रकोप का खतरा बढ़ जाता है। इसी अवधि में आम के पेड़ों पर फूल खिलना शुरू होते हैं। ऐसे में बागवानों को काफी सचेत रहने की सलाह दी जाती है।क्यों और कब जरूरी है छिड़काव?
विशेषज्ञों का कहना है कि आम के पेड़ों पर फूलों को मधुआ कीट, दहिया कीट, पाऊडरी मिल्ड्यू और एन्थ्रेक्नोज जैसी रोगों से बचाने के लिए तीन बार सही समय पर छिड़काव करना बेहद जरूरी है। यह छिड़काव ही तय करेगा कि आपके पेड़ पर कितने फल लगेंगे।
पहला छिड़काव फूल आने से ठीक पहले करें। इस समय पूरे पेड़ पर अच्छी तरह से छिड़काव करें। दूसरा छिड़काव फूलों में सरसों के दाने जैसे छोटे-छोटे दाने बनने पर करें। इस बार कीटनाशक के साथ एक फफूंदनाशक दवा भी मिलाएं। जब आम के टिकोले मटर के दाने के बराबर हो जाएं, तब तीसरा और आखिरी छिड़काव करना चाहिए।
सही दवा और सही मात्रा का रखें ध्यान
कीटों से बचाव के लिए बागवान इमिडाक्लोप्रिड (1 मि.ली. प्रति 3 लीटर पानी) या डाइमेथोएट (1 मि.ली. प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं। वहीं, फफूंद से होने वाली रोगों से बचाव के लिए सल्फर (3 ग्राम प्रति लीटर पानी), कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (3 ग्राम प्रति लीटर पानी) या कार्बेन्डाजिम (1 ग्राम प्रति लीटर पानी) का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन दवाओं का छिड़काव करने से मंजर स्वस्थ रहते हैं।
फूल और फल झड़ने से रोकने का भी उपाय
कई बार देखने का मिलता है कि मंजर और छोटे फल पेड़ से झड़ने लगते हैं। इस समस्या को रोकने के लिए विशेषज्ञ प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर के इस्तेमाल की सलाह देते हैं। किसान अल्फा-नेपथाईल एसीटिक एसीड नाम के पीजीआर की 4 मि.ली. मात्रा को 10 लीटर पानी में मिलाकर दूसरे और तीसरे छिड़काव के साथ इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे फल पेड़ पर टिके रहते हैं।




