खेती की बातें : महकता गुलाब कर देगा मालामाल, फरवरी में कर सकते हैं रोपाई, जानें पूरी विधि

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महकता गुलाब कर देगा मालामाल

महकता गुलाब कर देगा मालामाल
– फोटो : गांव जंक्शन

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गुलाब की खेती केवल फूल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई उत्पाद बनाने में भी उपयोगी है। गुलाब आधारित कुछ प्रमुख उत्पादों सुगंधित तेल, गुलकंद, गुलाब जल, इत्र, साबुन, चॉकलेट और अगरबत्ती जैसी चीजें शामिल हैं, जो किसानों के लिए नए अवसर खोल रही है। वैज्ञानिक और व्यवस्थित खेती अपनाने से उच्च गुणवत्ता वाला तेल तैयार होता है, जो बाजार में बेहतर मूल्य देता है और किसानों की आय बढ़ाता है।हाथरस केवीके के बागवानी वैज्ञानिक डॉ. हरविंदर पाल बताते हैं, अगर किसान उन्नत किस्मों का चयन करें, पौधों को संतुलित पोषण दें, रसायनों का सीमित और सुरक्षित उपयोग करें और सही समय पर फूल तोड़ें, तो गुलाब से सुगंधित तेल की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। 

6 से 7.5 के बीच हो मिट्टी का पीएच
गुलाब की खेती के लिए दोमट से बलुई दोमट मिट्टी, मध्यम जल-निकासी और उपोष्ण जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है। गुलाब के लिए आदर्श तापमान 15 से 30 डिग्री सेल्सियस है, क्योंकि अधिक ठंड में पाला और अधिक गर्मी में तेल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। मिट्टी का पीएच 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए। खेत को जलभराव से बचाएं, ताकि जड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

फरवरी में कर सकते हैं गुलाब की रोपाई 
गुलाब की खेती के लिए खेत की गहरी जुताई करें और प्रति हेक्टेयर 20-25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं। रोपण से पहले 200-250 किग्रा नीम खली डालना पौधों की सेहत और सुगंध बढ़ाने में सहायक है। कतारों के बीच 75-90 से.मी. और पौधे से पौधे की दूरी 45-60 से.मी. रखें। रोपाई का सही समय अक्तूबर-नवंबर या फरवरी है, जिससे पौधे अच्छी तरह बढ़ते हैं और फूलों की गुणवत्ता बेहतर होती है।

सुगंधित तेल के लिए ऐसे चुनें किस्में
सुगंधित तेल उत्पादन के लिए अधिक तेल की मात्रा और ज्यादा खुशबू वाली किस्में चुनें। रोजा डेमासेना इत्र और सुगंधित तेल के लिए उपयोगी किस्म है। रोजा सेंटिफोलिया किस्म इत्र उद्योग और पारंपरिक उपयोग के लिए बेहतर है। पंत गुलाब-1 और पंत गुलाब-2 स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल हैं। वहीं, गुलाब की एडवर्ड और ग्रांडीफ्लोरा टाइप किस्म फूल उत्पादन व सुगंधित तेल के लिए उपयोगी है।

सही सिंचाई तय करेगी सुगंधित तेल की गुणवत्ता
हाथरस कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. अतहर हुसैन वारसी ने बताया कि गुलाब की खेती में हल्की और नियमित सिंचाई करना जरूरी है। लेकिन, पौधों को अधिक पानी देने से फूलों में तेल की सघनता कम हो जाती है। ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत और तेल की गुणवत्ता बढ़ती है। वैज्ञानिक तरीके से छंटाई करने से नई शाखाएं निकलती हैं, जिन पर अधिक सुगंधित फूल आते हैं। अत्यधिक या बहुत हल्की छंटाई दोनों ही तेल उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं।

अपनाएं आईपीएम
गुलाब की फसल में पाउडरी मिल्ड्यू, डाइ बैक और ब्लैक स्पॉट जैसी बीमारियों का समय पर नियंत्रण जरूरी है। रासायनिक दवाओं का अधिक प्रयोग सुगंध और तेल की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर डाल सकता है, इसलिए एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) अपनाएं। नीम आधारित जैविक-कीटनाशक गुलाब के तेल की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक होते हैं।