
ड्रैगन फ्रूट की खेती – फोटो : सोशल मीडिया
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किसान अब सिर्फ पारंपरिक फसलें जैसे गेहूं, चना और आलू तक सीमित नहीं हैं। बदलते समय और बाजार की मांग को देखते हुए वे नई और विदेशी फसलें उगा रहे हैं। इन फसलों में ड्रैगन फ्रूट सबसे तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कम खर्च, कम झंझट और बाजार में शानदार दाम, जिससे यह किसानों के लिए एक सशक्त और भरोसेमंद आय का जरिया बन गई है।कम खर्च, ज्यादा मुनाफा
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट कहते हैं कि ड्रैगन फ्रूट की खेती में ज्यादा खाद और महंगी दवाइयों की जरूरत नहीं होती। पौधा मजबूत होता है, बीमारियां कम लगती हैं और देखभाल आसान रहती है। इस वजह से किसानों का खर्च कम और मुनाफा बढ़ जाता है।
ड्रैगन फ्रूट की खासियत
यह कैक्टस परिवार की फल वाली फसल है, जो दिखने में अनोखी और खाने में सेहतमंद है। इसमें फाइबर, विटामिन-C और एंटीऑक्सिडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं। यही कारण है कि शहरों में हेल्थ-कॉन्शियस लोग इसे तेजी से खरीद रहे हैं और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
मिट्टी और रोपाई का तरीका
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रैगन फ्रूट के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है। खेत का पीएच मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए और पानी भराव से बचना जरूरी है। पौधों को मई, जून या जुलाई में रोपना बेहतर रहता है। गड्ढों में गोबर और जैविक खाद मिलाकर पौध लगाए जाते हैं और पौधों के बीच 2×2 मीटर की दूरी रखी जाती है।
कमाई की शुरुआत और मांग
पौधे करीब डेढ़ साल में फल देना शुरू कर देते हैं और कई साल तक लगातार उत्पादन देते हैं। बाजार में लाल ड्रैगन फ्रूट की सबसे ज्यादा मांग है। इंदौर, दिल्ली और मुंबई की मंडियों में यह आसानी से बिकता है। दिल्ली की आजादपुर मंडी में 500 ग्राम ड्रैगन फ्रूट 100 रुपये तक बिक रहा है। ड्रैगन फ्रूट में बीमारियां कम होती हैं। अगर फंगस या चींटियों का खतरा हो तो नीम आधारित जैविक दवा और पानी की सही व्यवस्था पर्याप्त रहती है।




