उत्तर प्रदेश पुलिस की नई SOP: अब यूपी में ही प्राइवेट सुरक्षा गार्डों को मिलेगा प्रशिक्षण, सुरक्षा ढांचा होगा और मजबूत

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उत्तर प्रदेश में निजी सुरक्षा व्यवस्था को अधिक पेशेवर, संगठित और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने डीजीपी के निर्देशन में एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की है, जिसके तहत अब राज्य के भीतर ही प्राइवेट सुरक्षा गार्डों और सुपरवाइजरों को प्रशिक्षण देने के लिए अधिकृत ट्रेनिंग सेंटरों को लाइसेंस प्रदान किए जाएंगे।

अब तक प्रदेश की हजारों सुरक्षा एजेंसियों को अपने गार्डों के प्रशिक्षण के लिए अन्य राज्यों का रुख करना पड़ता था, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह निर्भरता खत्म होने की उम्मीद है। इससे प्रशिक्षण प्रक्रिया आसान होने के साथ सुरक्षा कर्मियों की दक्षता और अनुशासन में भी सुधार आएगा।

होगा बदलाव

नई SOP के अनुसार अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था को इस व्यवस्था का नियंत्रक प्राधिकारी बनाया गया है। प्रशिक्षण संस्थानों को लाइसेंस देने का अधिकार भी इसी स्तर पर तय किया गया है, ताकि गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की कमी न रहे। यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार की गई है, जिससे प्रशिक्षण का स्तर राष्ट्रीय मानकों के बराबर रखा जा सके।

इस पहल से सुरक्षा क्षेत्र में कई सकारात्मक बदलावों की उम्मीद जताई जा रही है। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि करीब 3,000 से अधिक लाइसेंसधारी सुरक्षा एजेंसियों को अब बाहर प्रशिक्षण कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे एजेंसियों का खर्च घटेगा और समय की भी बचत होगी। साथ ही नए ट्रेनिंग सेंटर खुलने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।

प्रशिक्षित और अनुशासित सुरक्षा गार्ड स्मार्ट सिटी और सेफ सिटी जैसी परियोजनाओं के लिए सहायक साबित होंगे। बेहतर प्रशिक्षण से निजी सुरक्षा बल पुलिस व्यवस्था के पूरक के रूप में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।

वेबसाइट पर देखें

इस नई व्यवस्था से जुड़ी विस्तृत जानकारी, पात्रता मानदंड और आवेदन प्रक्रिया उत्तर प्रदेश पुलिस वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है, जहां इच्छुक व्यक्ति या संस्थाएं SOP से संबंधित दिशा-निर्देश देख सकती हैं।

कुल मिलाकर, यह पहल निजी सुरक्षा क्षेत्र को व्यवस्थित करने के साथ राज्य में सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।