आधुनिक खेती के गुर : पोषक तत्वों के छिड़काव का किफायती तरीका अपनाएं, रबी फसलें देंगी बंपर उपज, जानें…

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पीएयू के विशेषज्ञों ने सुझाया पोषक तत्वों के छिड़काव का किफायती तरीका।

पीएयू के विशेषज्ञों ने सुझाया पोषक तत्वों के छिड़काव का किफायती तरीका।
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार


रबी फसलों से अच्छा उत्पादन हासिल करने के लिए पोषक तत्वों का सही प्रबंधन काफी अहम है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने किसानों को मिट्टी के अलावा सीधे पत्तीयों पर पोषक तत्वों के छिड़काव की सलाह दी है। यह तरीका फसल में जरूरी पोषक तत्वों की कमी को कम समय में दूर करने के साथ उपज में भी इजाफा करता है।छिड़काव का किफायती तरीका, कई मामलों में लाभकारी
जानकारों का कहना है कि कई मामलों में, जैसे कम सिंचाई, मिट्टी का अधिक पीएच मान होने पर पौधे तक पोषक तत्व का पहुंचना बाधित होता है, ऐसे में सीधे पत्तियों पर छिड़काव करना एक तेज समाधान बनकर उभरता है। 

मान लिजिए अगर गेहूं की फसल में नाइट्रोजन की कमी दिखाई पड़े , तो 3 प्रतिशत यूरिया के छिड़काव से उसे तुरंत ठीक किया जा सकता है। यह उन भारी मिट्टियों में और भी जरूरी हो जाता है जहां सिंचाई में देरी की वजह से पौधे पोषक तत्व नहीं सोख पाते।  इसके अलावा मिट्टी में खाद डालने की तुलना में पत्तियों पर छिड़काव करना किफायती होता है।

गेहूं, जौ और चने में छिड़काव के कई लाभ
जानकारों का कहना है कि गेहूं, जौ, चना, गन्ना और बरसीम जैसी फसलों पर पत्तियों के जरिए पोषक तत्व देने से बहुत अच्छा परिणाम मिलते हैं। गेहूं फसल में दाना बनते समय जिंक सल्फेट के छिड़काव से अनाज में जिंक की मात्रा बढ़ती है, जो मानव पोषण के लिए भी अच्छा है। वहीं, पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव दाना भरते समय गर्मी के प्रभाव से फसल को बचाता है।

वहीं, जौ में दाना बनने और दूधिया अवस्था में जिंक का छिड़काव अनाज की गुणवत्ता सुधारता है। चना बुआई के 90 और 110 दिनों के बाद यूरिया और जिंक सल्फेट का छिड़काव पैदावार को बढ़ा सकता है।

गन्ने और बरसीम के लिए सूक्ष्म पोषक तत्व जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं और बरसीम में जिंक और मैंगनीज की कमी आम बात है। मैंगनीज सल्फेट का छिड़काव न केवल इस कमी को दूर करता है, बल्कि चारे की गुणवत्ता भी सुधारता है। धान की खेती के बाद उगाई जाने वाली बरसीम में अक्सर मैंगनीज की कमी से पत्तियां झुलसने लगती हैं, जिसे समय पर छिड़काव से रोका जा सकता है। इसी तरह, गन्ने में अक्सर आयरन की कमी देखी जाती है, जिसके लिए फेरस सल्फेट का छिड़काव बेहद असरदार साबित होता है।

छिड़काव के दौरान बरतें ये सावधानी
जानकारों ने किसानों को एक खास चेतावनी दी है कि छिड़काव के दौरान अलग-अलग पोषक तत्वों को आपस में मिलाने से बचें। बिना विशेषज्ञों की सलाह के तत्वों को मिलाने से फसल पर जहरीला प्रभाव पड़ सकता है, जिससे फायदे की जगह नुकसान होने का डर रहता है।