उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पुलिस प्रशासन के भीतर अनुशासन और जवाबदेही को लेकर गंभीर स्थिति देखने को मिल रही है। लगातार शिकायतों और आरोपों के बाद पुलिस अधीक्षक केकेबिश्नोई ने प्रशासनिक सख्ती बढ़ा दी है। उनका मानना है कि यदि पुलिसकर्मी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर नहीं रहेंगे, तो जनता का भरोसा बनाए रखना मुश्किल होगा। ऐसे में उन्होंने जिले में गोपनीय जांच कराई, जिसके आधार पर कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई।
ये है मामला
दो दिन पहले संभल जिले की एसओजी टीम पर लगे गंभीर आरोपों की जांच पूरी होने के बाद पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने सभी सदस्यों को निलंबित कर दिया था। अब इसी कड़ी में एक बार फिर कार्रवाई करते हुए 39 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है। इसमें एक सब-इंस्पेक्टर, 11 हेड कांस्टेबल और 27 कांस्टेबल शामिल हैं। साथ ही, एक पुलिस चौकी प्रभारी को भी लाइन हाजिर किया गया है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार यह कार्रवाई उन शिकायतों और आरोपों के आधार पर की गई, जो जिले में पुलिस प्रशासन के भीतर सामने आई थीं। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखना और जनता का भरोसा बनाए रखना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी पुलिसकर्मी की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है।
जांच में पाया गया ये
गोपनीय जांच में यह देखा गया कि कौन से पुलिसकर्मी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर नहीं थे और जनता के प्रति अनुचित व्यवहार कर रहे थे। ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को लाइन हाजिर करना प्रशासनिक कार्रवाई का हिस्सा है, ताकि अन्य पुलिसकर्मियों में अनुशासन और जवाबदेही की भावना बनी रहे।
संभल में यह कार्रवाई पुलिस प्रशासन में सख्ती और जवाबदेही बनाए रखने की दिशा में एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई के दृढ़ रुख को दर्शाती है। उनका मानना है कि अनुशासनहीनता पर कार्रवाई न करने से न केवल जनता का भरोसा कम होगा, बल्कि भ्रष्टाचार और लापरवाही को बढ़ावा मिलेगा।












