काम की बात : आम के बागों में हॉपर कीट का खतरा, देसी लाइट ट्रैप तकनीक से बचा सकते हैं फसल

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आम को फलों का राजा माना जाता है। – फोटो : सोशल मीडिया

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आम को फलों का राजा माना जाता है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में आम की फसल बड़ी तादात में होती है। यूपी में किसान दशहरी, चौसा और लंगड़ा जैसी बेहतरीन आम की किस्में उगाते हैं। हालांकि, फरवरी और मार्च का समय आम बागवानों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण होता है। जैसे ही मौसम में हल्की गर्माहट आती है, आम के पेड़ों पर बौर निकलने लगता है और इसी के साथ शुरू हो जाता है खतरनाक कीटों का हमला। इन कीटों में सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाला हॉपर कीट है, जो बौर का रस चूसकर फूलों को कमजोर कर देता है। नतीजतन, बौर झड़ने लगता है और आम की पैदावार पर सीधा असर पड़ता है।

रासायनिक कीटनाशक बन रहे हैं समस्या
आमतौर पर किसान हॉपर कीट से बचाव के लिए तेज रासायनिक कीटनाशकों का सहारा लेते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, ये दवाइयां जहां एक ओर कीटों को मारती हैं, वहीं दूसरी ओर आम के कोमल बौर को झुलसा देती हैं। इससे पेड़ की सेहत कमजोर होती है और लंबे समय में उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब किसानों को रसायनों के बजाय सुरक्षित और सस्ते यांत्रिक तरीकों को अपनाना चाहिए।

हॉपर नियंत्रण के लिए ‘लाइट ट्रैप’ कारगर उपाय
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, हॉपर कीट नियंत्रण के लिए ‘लाइट ट्रैप’ तकनीक बेहद प्रभावी है। यह विधि कीटों की उस कमजोरी पर काम करती है, जिसमें वे रोशनी की ओर आकर्षित होते हैं। बाग में रोशनी जलाने पर हॉपर उड़कर वहां पहुंचते हैं और जाल में फंसकर नष्ट हो जाते हैं। इससे उनका जीवन चक्र टूट जाता है और वे आगे अंडे नहीं दे पाते।

घर पर ऐसे बनाएं देसी लाइट ट्रैप
ट्यूबवेल विधि
यदि बाग में ट्यूबवेल की होद (पानी का टैंक) है, तो उसमें पानी भर दें। पानी से करीब एक फीट ऊपर एक बल्ब टांग दें और रात भर जलने दें। रोशनी से आकर्षित होकर हॉपर कीट पानी में गिर जाएंगे और नष्ट हो जाएंगे।

पीला डिब्बा तकनीक:
एक पीले रंग का प्लास्टिक डिब्बा लें। उसमें छोटा बल्ब या बैटरी वाली लाइट लगाएं। डिब्बे के निचले हिस्से में थोड़ा कीटनाशक मिला पानी भर दें और इसे पेड़ों पर लटका दें। पीला रंग और रोशनी कीटों को आकर्षित करती है, जिससे वे डिब्बे में गिरकर मर जाते हैं।

अभी नियंत्रण जरूरी क्यों?
एक्सपर्ट कहते हैं कि इस समय हॉपर कीट तेजी से फैल रहा है। यदि शुरुआती दौर में इनकी संख्या पर नियंत्रण कर लिया जाए, तो आगे चलकर फलों को होने वाला नुकसान काफी कम किया जा सकता है। यह तरीका न केवल आम की फसल को सुरक्षित रखता है, बल्कि कीटनाशकों पर होने वाले हजारों रुपये के खर्च से भी बचाता है।