
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल
– फोटो : गांव जंक्शन
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भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में भारत ने अनाज, डेयरी, मांस और अन्य संवेदनशील कृषि उत्पादों पर किसी भी तरह की ड्यूटी रियायत नहीं दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों और ग्रामीण आजीविका की सुरक्षा हर व्यापार वार्ता में सर्वोपरि रहेगी।भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते में भारत ने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। इस समझौते के तहत अमेरिका को मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन, डेयरी उत्पाद, पोल्ट्री, मांस, तंबाकू, इथेनॉल और कुछ सब्जियों पर किसी भी प्रकार की आयात शुल्क (ड्यूटी) रियायत नहीं दी जाएगी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह समझौता किसानों के हितों की रक्षा और ग्रामीण आजीविका को सुरक्षित रखने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका से जुड़े उत्पादों को पूरी तरह संरक्षण दिया गया है।
डेयरी एवं कृषि उत्पादों पर कोई रियायत नहीं
गोयल ने स्पष्ट किया कि अनाज, फल, सब्जियां, मसाले, तिलहन, डेयरी, पोल्ट्री और मांस जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी गई है, जबकि भारतीय उत्पादों के लिए अमेरिका में प्राथमिकता आधारित बाजार पहुंच सुनिश्चित की गई है।
पहले के एफटीए में भी यही नीति
भारत ने इससे पहले यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) में भी डेयरी और संवेदनशील कृषि उत्पादों को बाहर रखा है। इन समझौतों में कुछ क्षेत्रों में तत्काल शुल्क समाप्त किए जाते हैं, जबकि कुछ में चरणबद्ध कटौती या कोटा आधारित रियायतें दी जाती हैं।
आयात शुल्क-नियामक उपाय बनेंगे कृषि की ढाल
भारत में कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र 70 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं। विकसित देशों के विपरीत, भारत में कृषि केवल व्यवसाय नहीं बल्कि आजीविका का साधन है, इसलिए इस क्षेत्र को उच्च आयात शुल्क और नियामक उपायों से संरक्षित किया जाता है।
भारत-अमेरिका के बीच कृषि व्यापार
वर्ष 2024 में अमेरिका से भारत को कृषि निर्यात 1.6 अरब डॉलर का रहा, जिसमें मुख्य रूप से बादाम, पिस्ता, सेब और ईथेनॉल शामिल हैं। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल कृषि निर्यात बढ़कर 51 अरब डॉलर से अधिक हो गया, जिसमें से लगभग 5 अरब डॉलर का निर्यात अमेरिका को किया गया।
निर्यात को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य
भारत अगले चार वर्षों में कृषि, समुद्री उत्पाद और खाद्य-पेय पदार्थों के संयुक्त निर्यात को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखता है। प्रमुख निर्यात उत्पादों में चाय, कॉफी, चावल, मसाले, काजू, तिलहन, फल और सब्जियां शामिल हैं।




