
सांकेतिक तस्वीर – फोटो : सोशल मीडिया
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भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसकी खेती लाखों किसानों की आय का प्रमुख आधार है। अच्छी पैदावार और बेहतर गुणवत्ता पाने के लिए केवल सिंचाई, खाद और कीटनाशकों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। आम के पौधों को सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है, जिनमें बोरॉन का विशेष महत्व है। बोरॉन पौधों की आंतरिक क्रियाओं, फूलों के विकास, फल बनने और फलों की गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभाता है। सरदार पटेल कृषि विश्वविद्यालय, मेरठ के कृषि वैज्ञानिक डॉ आर.एस. सेंगर ने बताया कि इसका बड़ा असर आम की फसल पर पड़ता है। सामान्यतः मिट्टी में 0.5 से 2.0 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम बोरॉन पर्याप्त माना जाता है। नाइट्रोजन जैसे पोषक तत्वों की तुलना में इसकी जरूरत कम होती है, फिर भी पौधों की आंतरिक क्रिया और फसल की गुणवत्ता में इसकी भूमिका बेहद अहम होती है।
पौधों की वृद्धि के लिए जरूरी तत्व
बोरॉन पौधों की कई अहम जैविक प्रक्रियाओं में शामिल होता है। यह कोशिका भित्ति के निर्माण में मदद करता है, जो पौधों की वृद्धि के लिए जरूरी है। बोरॉन की कमी से नई जड़ें और अंकुर ठीक से विकसित नहीं होते, पत्तियों के सिरे पीले या भूरे हो जाते हैं। शर्करा का परिवहन बाधित होता है, परागण अधूरा रहता है और फल-बीज नहीं बनते, जिससे पैदावार और गुणवत्ता दोनों घट जाती हैं।
फूलों के विकास और परागण में सहायक
आम की खेती में बोरॉन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यह फूलों के सही विकास और परागण में सहायता करता है, जिससे फल बनने की प्रक्रिया बेहतर होती है। पर्याप्त बोरॉन से आम का आकार, मिठास और गूदे की गुणवत्ता सुधरती है। यह कोशिका भित्ति को मजबूत बनाकर पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है तथा फलों के फटने और विकृति की समस्या से भी बचाव करता है।
बोरॉन की कमी से दिखने वाले लक्षण
बोरॉन की कमी होने पर आम के पौधों में कई स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं। नई निकलने वाली पत्तियां छोटी, मोटी और विकृत हो जाती हैं तथा उनकी बढ़वार रुक जाती है। फलों का आकार छोटा रह जाता है या वे टेढ़े-मेढ़े विकसित होते हैं। फूलों की संख्या कम हो जाती है और परागण सही ढंग से नहीं हो पाता। इसके कारण फल झड़ने की दर बढ़ जाती है और कुल उपज प्रभावित होती है।
संतुलित मात्रा में करें उपयोग
बोरॉन का प्रयोग आम के बगीचों में सही तरीके से करना जरूरी है। पत्तियों पर स्प्रे के रूप में मोजेक मैग्ना बोरॉन को 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव किया जा सकता है। मिट्टी में बोरॉन की पूर्ति के लिए बोरैक्स जैसे उर्वरक 1 से 2 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से मिलाएं। इसके अलावा, बोरॉन को एनपीके या अन्य उर्वरकों के साथ संतुलित मात्रा में दें।
बोरॉन की अधिक मात्रा पौधों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इसलिए, इसका प्रयोग हमेशा सावधानी से करना चाहिए। बोरॉन देने से पहले मिट्टी की जांच कराना सबसे बेहतर रहता है। आमतौर पर वर्ष में 1-2 बार बोरॉन का प्रयोग पर्याप्त होता है। इससे पौधों को लाभ मिलता है और किसी भी तरह की विषाक्तता से बचाव होता है।




