महाराष्ट्र में शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों को रोकने के लिए बसों में ब्रेथ एनालाइज़र लगाए जाएंगे

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राज्य के हाईवे पर होने वाले एक्सीडेंट को रोकने के लिए ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने अब कमर कस ली है। अब राज्य सरकार बसों में ब्रेक एनालाइजर नाम का एक मॉडर्न सिस्टम लगाने पर विचार कर रही है। यह सिस्टम लगाने के बाद अगर ड्राइवर ने शराब पी रखी है, तो बस को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा। एक सिस्टम की कीमत करीब 1.5 लाख रुपये है।(Maharashtra to Install Breath Analyzers in Buses to Stop Drunk Driving Government Tough New Safety Push)

प्राइवेट बस मालिक भी अपनी गाड़ियों में यह सिस्टम लगाएं

ST कॉर्पोरेशन के बेड़े में आने वाली नई बसों के साथ-साथ टाटा और अशोक लेलैंड कंपनियों से खरीदी गई गाड़ियों में भी यह सिस्टम ज़रूरी करने का फैसला किया गया है। मंत्री ने साफ निर्देश दिए हैं कि प्राइवेट बस मालिक भी अपनी गाड़ियों में यह सिस्टम लगाएं।स्लीपर कोच बसों में बिना इजाज़त बदलाव के खिलाफ कार्रवाई

नियमों को तोड़ने वाली और यात्रियों की जान से खेलने वाली बसों पर कड़ी नज़र 

कई प्राइवेट बस ड्राइवर स्लीपर कोच के नाम पर बस के डिज़ाइन में बिना इजाज़त बदलाव करते हैं, जिससे एक्सीडेंट होने पर यात्रियों का बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। पहले सिर्फ एक स्लीपर कोच होता था। लेकिन अब दो लेवल पर स्लीपर कोच लगाए जा रहे हैं।हालांकि विदेशों में ऐसे स्लीपर कोच बैन हैं, लेकिन भारत में यह सर्विस केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक चल रही है। भले ही महाराष्ट्र ने इस पर रोक लगा दी है, लेकिन दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड बसें राज्य में आ सकती हैं। मंत्री ने इस तकनीकी मुश्किल को भी साफ किया। हालांकि, नियमों को तोड़ने वाली और यात्रियों की जान से खेलने वाली बसों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है।

स्पीड लिमिट और रोड सेफ्टी मास्टर प्लान

बसों की बढ़ती स्पीड को कंट्रोल करने के लिए अधिकारियों को सभी बसों में 80 kmph की लिमिट वाले स्पीडोमीटर लगाने के आदेश दिए गए हैं। शिकायतें मिली हैं कि कुछ प्राइवेट बसें 120 से 140 kmph की स्पीड से चल रही हैं, और ऐसी गाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा, पूरे राज्य की सड़कों के लिए एक खास सेफ्टी प्लान तैयार किया जा रहा है। इसमें रिफ्लेक्टर, तीर के निशान, यू-टर्न और सीधी लेन के लिए डायरेक्शन बोर्ड लगाए जाएंगे। सभी मुख्य सड़कों और म्युनिसिपल एरिया में 100, 200, 300 और 500 मीटर की दूरी बताने वाले बोर्ड लगाए जाएंगे।

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