मेट्रो सुरक्षा ऑडिट की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

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इस महीने की शुरुआत में मुलुंड में हुए एक जानलेवा हादसे के बाद, मुंबई में बन रहे सभी मेट्रो कॉरिडोर के पूरे स्ट्रक्चरल सेफ्टी असेसमेंट की मांग करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन फाइल की गई है। यह पिटीशन 14 फरवरी को हुई एक दुखद घटना के बाद फाइल की गई थी, जब बन रहे मुंबई मेट्रो लाइन 4B के पैरापेट स्लैब का एक हिस्सा LBS मार्ग पर गिर गया था। गिरने वाला मलबा एक चलते हुए ऑटोरिक्शा और एक प्राइवेट कार से टकराया था। बताया गया कि उत्तर प्रदेश के एक किसान और सरपंच रामधन यादव की तुरंत मौत हो गई थी। ऑटोरिक्शा ड्राइवर और कैब ड्राइवर को गंभीर चोटें आईं।(PIL Filed in HC Seeking Metro Safety Audit)

इंडिपेंडेंट थर्ड-पार्टी सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग 

पिटीशन के ज़रिए, शहर में सभी मेट्रो कंस्ट्रक्शन साइट्स का एक इंडिपेंडेंट थर्ड-पार्टी सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की गई है। यह रिक्वेस्ट की गई है कि 14 फरवरी के हादसे की सही वजह बताते हुए एक डिटेल्ड रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की जाए। बिज़ी आर्टेरियल सड़कों पर बने एलिवेटेड मेट्रो पार्ट्स के कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड और स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी को लेकर चिंताएं जताई गई हैं। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी पर भी सवाल उठाए गए हैं, जो मुंबई में कई मेट्रो कॉरिडोर की देखरेख कर रही है।  इस बात का जवाब मांगा गया है कि जानलेवा घटना में शामिल कॉन्ट्रैक्टर के खिलाफ ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई कथित तौर पर क्यों शुरू नहीं की गई है। मृतक के परिवार और घायल पीड़ितों को दिए गए मुआवज़े के बारे में ट्रांसपेरेंसी की भी मांग की गई है।

LBS मार्ग पर मेट्रो कंस्ट्रक्शन के काम को तुरंत रोकने की रिक्वेस्ट

अंतरिम राहत के तौर पर, मुलुंड वेस्ट में फ्रेंड्स एकेडमी के पास LBS मार्ग पर मेट्रो कंस्ट्रक्शन के काम को तुरंत रोकने की रिक्वेस्ट की गई है, और उस हिस्से का स्ट्रक्चरल सेफ्टी इवैल्यूएशन करने की अपील की गई है। कांजुरमार्ग के पास पवई मोड़ के पास चल रहे मेट्रो काम के लिए भी इसी तरह के निर्देश मांगे गए हैं। पिटीशन में कहा गया है कि रोज़ाना ऊंचे मेट्रो स्ट्रक्चर के नीचे से सफर करने वाले यात्रियों में डर पैदा हो गया है। शहर भर में इंफ्रास्ट्रक्चर साइट्स पर अकाउंटेबिलिटी और पब्लिक सेफ्टी सेफगार्ड्स की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है।

इस मामले की सुनवाई अगले हफ़्ते चीफ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस गौतम अंखड की डिवीजन बेंच द्वारा किए जाने की उम्मीद है। सुनवाई के नतीजे का मुंबई के बढ़ते मेट्रो नेटवर्क में सेफ्टी ओवरसाइट और रेगुलेटरी एनफोर्समेंट पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है।

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