शिवसेना ने राज्यसभा के लिए डॉ. ज्योति वाघमारे को उम्मीदवार बनाया

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शिवसेना मुख्य नेता एकनाथ शिंदे ने एक बार फिर सामान्य और गरीब परिवार से आई एक बेटी को ताकत देने का काम किया है। शिवसेना ने राज्यसभा के लिए डॉ. ज्योति वाघमारे को उम्मीदवार बनाया है। डॉ. वाघमारे ने आज उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस अवसर पर शिवसेना के सांसद और संसद रत्न डॉ. श्रीकांत शिंदे, मंत्री दादाजी भुसे, मंत्री संजय शिरसाट, विधायक डॉ. मनीषा कायंदे, वरिष्ठ नेता गजानन कीर्तिकर, आनंदराव अडसूळ सहित पार्टी के कई प्रमुख नेता उपस्थित थे। इससे एक बार फिर साबित होता है कि एकनाथ शिंदे अपनी “लाड़ली बहनों” के पीछे पूरी मजबूती के साथ खड़े हैं।(Shiv Sena nominates Dr Jyoti Waghmare for Rajya Sabha)

डॉ. ज्योति वाघमारे ने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन भरने के बाद भावुक

डॉ. ज्योति वाघमारे ने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन भरने के बाद भावुक हो गईं। उन्हें अब तक विश्वास नहीं हो रहा है कि एक सामान्य और गरीब परिवार की लड़की को राज्यसभा की उम्मीदवारी दी गई है। भावुक होते हुए डॉ. ज्योति वाघमारे ने कहा कि उनके परिवार के किसी भी सदस्य का राजनीति से कोई संबंध नहीं रहा है। उनके पिता दलित पैंथर के एक कार्यकर्ता थे और मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। उन्हें यह भी पता नहीं था कि उच्च सदन क्या होता है और निचला सदन क्या होता है। ऐसे साधारण परिवार से आने वाली बेटी को एकनाथ शिंदे जी ने राज्यसभा की उम्मीदवारी देकर बड़ा सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उम्मीदवारी नहीं है, बल्कि यह पिछड़े समाज के हर व्यक्ति की उम्मीदवारी है। यह राज्य की ढाई करोड़ बहनों की उम्मीदवारी है, यह बाबा साहेब आंबेडकर के हाथों में रहे उस कलम की उम्मीदवारी है जिसने हमें संविधान दिया। उन्होंने आगे कहा कि शिवसेना पार्टी ने एक दलित के बेटे और भीमराज की बेटी को न्याय देने का काम किया है।

“एकनाथ शिंदे हमेशा एक भाई की तरह अपनी बहनों के पीछे मजबूती से खड़े”

डॉ. ज्योति वाघमारे ने शिवसेना के मुख्य नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एकनाथ शिंदे हमेशा एक भाई की तरह अपनी बहनों के पीछे मजबूती से खड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि मैं एक गरीब परिवार से आती हूँ। जब मैं स्कूल में पढ़ती थी, तब मेरे पैरों में चप्पल तक नहीं होती थी। सोलापुर की गलियों में बिना चप्पल के दौड़ने वाली एक बेटी आज दिल्ली जा रही है, यह किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी ने उन पर जो विश्वास जताया है, उस पर वे पूरी ईमानदारी से खरा उतरने की कोशिश करेंगी।

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