वाणिज्य मंत्री का दावा : 90-95% कृषि उत्पाद डील से बाहर, अमेरिकी कपास पर टेक्सटाइल उद्योग को जीरो टैरिफ का लाभ

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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल
– फोटो : गांव जंक्शन

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नई दिल्ली में गुरुवार को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते में भारत के लगभग 90% से 95% कृषि उत्पादों को शामिल नहीं किया गया है, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रह सकें। उन्होंने कहा कि इस समझौते में किसानों के हितों की पूरी तरह रक्षा की गई है और कृषि क्षेत्र पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।टेक्सटाइल सेक्टर को कपास पर जीरो-टैरिफ लाभ
पीयूष गोयल ने यह भी बताया कि समझौते के तहत भारतीय टेक्सटाइल और परिधान निर्यातकों को अमेरिकी कपास के उपयोग पर जीरो-टैरिफ सुविधा मिलने की उम्मीद है, जब अंतरिम समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को जो सुविधा मिली है, वैसी ही सुविधा भारत को भी मिलेगी। उन्होंने कहा,  अभी फ्रेमवर्क एग्रीमेंट तैयार हो रहा है। जब अंतरिम समझौता अंतिम रूप ले लेगा, तब इसकी बारीकियां सामने आएंगी। 

बांग्लादेश को ज्यादा लाभ मिलने के आरोप पर पलटवार
9 फरवरी को अमेरिका और बांग्लादेश के बीच हुए समझौते में पारस्परिक टैरिफ को 20% से घटाकर 19% किया गया। साथ ही, अमेरिकी कपास और मैन-मेड फाइबर से बने विशेष टेक्सटाइल उत्पादों को जीरो-टैरिफ एक्सेस दिया गया।

विपक्ष ने आरोप लगाया था कि बांग्लादेश को भारत से ज्यादा लाभ मिला है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गोयल ने कहा, “राहुल गांधी ने संसद में झूठ फैलाया कि बांग्लादेश को भारत से ज्यादा फायदा मिला है। जिस तरह बांग्लादेश को अमेरिकी कच्चा माल खरीदकर प्रोसेस कर निर्यात करने पर जीरो-टैरिफ मिलता है, वैसी ही सुविधा भारत को भी मिलेगी।” उन्होंने राहुल गांधी से किसानों, मछुआरों, MSME क्षेत्र के श्रमिकों और विश्वकर्माओं से माफी मांगने की मांग की है। 

SBI रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका भारत और बांग्लादेश से लगभग 7.5 अरब डॉलर का टेक्सटाइल आयात करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश को 19% टैरिफ और विशेष शर्तों के तहत जीरो-टैरिफ सुविधा मिलने से भारतीय निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, क्योंकि इससे बांग्लादेशी उत्पाद अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं।

50% से घटकर 18% हुआ टैरिफ
ट्रंप प्रशासन ने अगस्त 2025 से भारत सहित कई देशों पर 50% टैरिफ लगाया था। हालांकि, हालिया फोन कॉल के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बातचीत के पश्चात यह टैरिफ घटाकर 18% कर दिया गया है। 2 फरवरी को हुई बातचीत के बाद लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते पर वार्ता पूरी होने की घोषणा की गई थी। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट फरवरी 2025 में औपचारिक रूप से प्रस्तावित हुआ था, जिसका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

मार्च में सामने आएगी समझौते की पूरी तस्वीर
भारत और अमेरिका ने हाल ही में अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दिया है, जिसकी विस्तृत शर्तें (फाइन प्रिंट) मार्च में सामने आने की संभावना है। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को भी दूर करने पर सहमति जताई है।

सरकार का दावा है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कृषि क्षेत्र को व्यापक रूप से बाहर रखकर किसानों के हित सुरक्षित किए गए हैं, जबकि टेक्सटाइल उद्योग को जीरो-टैरिफ सुविधा से प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की उम्मीद है। हालांकि, विपक्ष और कुछ विश्लेषकों की ओर से प्रतिस्पर्धा और बाजार हिस्सेदारी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिनका स्पष्ट जवाब समझौते के विस्तृत प्रावधान सामने आने के बाद ही मिलेगा।