
सांकेतिक तस्वीर
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महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में गन्ना किसानों के भुगतान को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। नांदेड़ स्थित चीनी आयुक्त कार्यालय ने नांदेड़, लातूर और परभणी जिलों में संचालित आठ चीनी मिलों को समय पर गन्ना किसानों को उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का भुगतान नहीं करने पर कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 के प्रावधानों के तहत की गई है। एग्रोवन की रिपोर्ट के अनुसार, नांदेड़ के क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक (चीनी) ने संबंधित चीनी मिलों के कार्यकारी निदेशकों को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह कदम स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के जिला अध्यक्ष हनुमंत राजेगोर द्वारा किसानों के भुगतान में देरी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के बाद उठाया गया है।
412 करोड़ रुपये से अधिक बकाया
2025-26 पेराई सत्र में 31 जनवरी तक की स्थिति में गन्ना उत्पादकों के लगभग 412 करोड़ रुपये एफआरपी के रूप में बकाया हैं। इस रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए चीनी आयुक्त ने दोषी मिलों को नोटिस जारी करने और सुनवाई तय करने के निर्देश दिए।
इन मिलों पर कार्रवाई
जिन चीनी मिलों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें योगेश्वरी शुगर इंडस्ट्रीज, बलिराजा साखर कारखाना, श्री लक्ष्मीनृसिंह शुगर्स एलएलपी, कपिश्वर शुगर्स एंड केमिकल्स, कुंटुरकर शुगर्स एंड एग्रो प्राइवेट लिमिटेड और ट्वेंटी वन शुगर द्वारा संचालित तीन इकाइयाँ शामिल हैं। गन्ना (नियंत्रण) आदेश के अनुसार, मिलों को गन्ना आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर किसानों को एफआरपी का भुगतान करना अनिवार्य है। तय समय सीमा से अधिक देरी होने पर 15 प्रतिशत ब्याज देने का भी प्रावधान है। रिपोर्टों से स्पष्ट है कि संबंधित मिलों ने इस नियम का पालन नहीं किया।
तय तारीखों पर होगी सुनवाई
क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक (चीनी), नांदेड़ कार्यालय में 13 फरवरी और 16 फरवरी को सुबह 11 बजे सुनवाई निर्धारित की गई है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि मिलों के वरिष्ठ अधिकारियों को सभी संबंधित दस्तावेजों के साथ स्वयं उपस्थित होना होगा, किसी प्रतिनिधि को भेजने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस कार्रवाई से गन्ना किसानों को जल्द भुगतान मिलने की उम्मीद बढ़ी है और मिलों पर नियमों के पालन का दबाव भी मजबूत हुआ है।




