
आने वाले दिनों में करीब 125 लाख टन गेहूं मंडियों में आने की उम्मीद है, जबकि लगभग 50 लाख टन गेहूं रखने की जगह ही नहीं है। – फोटो : सोशल मीडिया
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खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव राहुल तिवारी ने कहा है कि मंडियों के शेड को अस्थायी खुले चबूतरों में बदलने पर भी सिर्फ 1.2 से 1.5 लाख टन अतिरिक्त जगह ही मिल पाएगी। उधर, आने वाले दिनों में करीब 125 लाख टन गेहूं मंडियों में आने की उम्मीद है, जबकि लगभग 50 लाख टन गेहूं रखने की जगह ही नहीं है।सरकार से मदद की मांग
इस संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पहले ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी से बात की थी। भरोसा मिला कि पंजाब से दूसरे राज्यों में अनाज भेजने की रफ्तार बढ़ाई जाएगी, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अभी तक ढुलाई बहुत धीमी है।
पिछले साल का स्टॉक भी बना मुसीबत
पंजाब में पिछले साल का करीब 50 लाख टन गेहूं पहले से जमा है। जबकि राज्य की कुल भंडारण क्षमता करीब 75 लाख टन ही है। यानी नई फसल आने से पहले गोदाम खाली करना जरूरी है, नहीं तो किसानों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
तुरंत बढ़ानी होगी अनाज की ढुलाई
अधिकारियों का कहना है कि फरवरी-मार्च में कम से कम 25 लाख टन गेहूं बाहर भेजना जरूरी है। अगर 15 अप्रैल तक गोदाम खाली नहीं हुए, तो खरीद के समय ट्रांसपोर्ट और भुगतान में देरी हो सकती है।
किसानों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
अगर मंडियों में जगह नहीं मिली, तो गेहूं की खरीद में देरी हो सकती है। इसका सीधा असर किसानों की आमदनी और भुगतान पर पड़ेगा। ऐसे हालात पहले भी राजनीतिक मुद्दा बन चुके हैं, इसलिए सरकार पर दबाव भी बढ़ रहा है।
पंजाब में गेहूं खरीद से पहले भंडारण संकट गहरा गया है। गोदाम भरे होने से करीब 50 लाख टन गेहूं रखने की जगह नहीं है। सरकार से अनाज की ढुलाई तेज करने की मांग की गई है, ताकि किसानों और प्रशासन को बड़ी परेशानी से बचाया जा सके।




