
सांकेतिक तस्वीर – फोटो : AI Image
विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें
खेतों और बागानों में दिखाई देने वाले छोटे-छोटे कीड़े किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं। एफिड्स (Aphids), व्हाइटफ्लाई (Whiteflies), थ्रिप्स (Thrips) और मिलीबग्स (Mealy bugs) जैसे कीट धीरे-धीरे पौधों का रस चूसकर उनकी ताकत खत्म कर देते हैं। शुरुआत में इनका असर कम दिखता है, लेकिन समय पर नियंत्रण न किया जाए तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है।कैसे करते हैं ये कीट नुकसान
ये कीट पत्तियों, तनों और नई कोपलों से पोषक तत्व चूस लेते हैं, जिससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है। कई बार इनके कारण पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, फूल-फल झड़ने लगते हैं और उत्पादन में भारी गिरावट आ जाती है।
समय पर पहचान से बच सकती है फसल
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसान नियमित रूप से खेत की निगरानी करें और शुरुआती लक्षण पहचान लें, तो फसल को बचाया जा सकता है। रासायनिक दवाओं की जगह प्राकृतिक और जैविक उपाय अपनाने से लागत भी कम होती है और मिट्टी की सेहत भी बनी रहती है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
- पत्तियों पर चिपचिपापन या काली फफूंद
- पत्तियों का मुड़ना या सिकुड़ना
- सफेद रुई जैसे गुच्छे (मिलीबग)
- पत्तियां हिलाने पर छोटी सफेद मक्खियों का उड़ना
- पत्तियों पर पीले या सिल्वर धब्बे
जैविक और सुरक्षित उपाय
- नीम तेल का 3-5 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव
- पीले और नीले स्टिकी ट्रैप लगाना
- अत्यधिक नाइट्रोजन खाद से बचाव
- वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खाद से मिट्टी को मजबूत बनाना
- संक्रमित पत्तियों और टहनियों को तुरंत नष्ट करना
विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत और स्वस्थ पौधों पर कीटों का असर कम होता है। इसलिए मिट्टी की सेहत, संतुलित खाद और समय पर सिंचाई पर ध्यान देना जरूरी है।




