एलपीजी संकट के कारण मुंबई रेलवे स्टॉलों से वड़ा पाव और समोसा गायब होने का खतरा !

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मुंबई. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण उत्पन्न एलपीजी संकट का असर अब देश की रेल सेवाओं और यात्रियों की खानपान व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है. मुंबई के रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाले लोकप्रिय नाश्ते जैसे वड़ा पाव, समोसा और ब्रेड पकोड़ा आने वाले दिनों में रेलवे फूड स्टॉलों से गायब हो सकते हैं. रेलवे अधिकारियों और खानपान सेवाओं से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण भोजन तैयार करने में दिक्कतें सामने आ रही हैं, जिससे रेलवे के खानपान प्रबंधन पर दबाव बढ़ गया है.

रेलवे खानपान सेवाएं संभालने वाली संस्था Indian Railway Catering and Tourism Corporation के सूत्रों के मुताबिक मुंबई के सेवरी क्षेत्र में स्थित क्लाउड किचन, जहां से रोजाना हजारों यात्रियों के लिए भोजन तैयार किया जाता है, एलपीजी खत्म होने के कारण कुछ समय के लिए भोजन तैयार नहीं कर सका. यह क्लाउड किचन मध्य और पश्चिम रेलवे की ट्रेनों में सफर करने वाले करीब 4500 यात्रियों के लिए रोजाना भोजन तैयार करता है. गैस की कमी के कारण बुधवार को यहां भोजन पकाने का काम प्रभावित हुआ, जिससे रेलवे अधिकारियों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी.

यह क्लाउड किचन कई प्रमुख और प्रीमियम ट्रेनों को भोजन उपलब्ध कराता है, जिनमें Vande Bharat Express, Rajdhani Express, Duronto Express, Shatabdi Express और Tejas Express जैसी ट्रेनों का नाम शामिल है. अधिकारियों ने बताया कि स्थिति से निपटने के लिए कुछ ट्रेनों के पेंट्री कार में पहले से तैयार रेडी-टू-ईट भोजन का स्टॉक रखा गया, ताकि यात्रियों को भोजन सेवा में बाधा न आए.

हालांकि समस्या केवल लंबी दूरी की ट्रेनों तक सीमित नहीं है. मुंबई की उपनगरीय रेल सेवाओं का उपयोग करने वाले लाखों यात्रियों पर भी इसका असर पड़ सकता है. रेलवे स्टेशनों पर मौजूद फूड स्टॉलों पर बनने वाले तले हुए खाद्य पदार्थों के लिए बड़ी मात्रा में एलपीजी की जरूरत होती है. ऐसे में गैस की कमी के कारण वड़ा पाव, समोसा, ब्रेड पकोड़ा जैसे लोकप्रिय स्नैक्स के अलावा ताजा बनने वाले इडली और पोहा जैसे नाश्ते भी कुछ समय के लिए उपलब्ध नहीं हो सकते.

रेलवे के खानपान स्टॉल संचालकों का कहना है कि फिलहाल उनके पास लगभग एक सप्ताह तक का एलपीजी स्टॉक मौजूद है, लेकिन यदि आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में समस्या गंभीर हो सकती है. एक स्टॉल संचालक ने बताया कि बड़े स्तर पर उपयोग होने वाले इलेक्ट्रिक चूल्हे या इंडक्शन कुकर काफी महंगे होते हैं, इसलिए छोटे स्टॉल संचालकों के लिए उन्हें खरीदना आर्थिक रूप से आसान नहीं है.

मुंबई रेल मंडल में फूड स्टॉलों की संख्या भी काफी अधिक है. पश्चिम रेलवे के मुंबई मंडल में करीब 460 फूड स्टॉल हैं, जिनमें से 264 चर्चगेट से दहानू तक चलने वाली उपनगरीय लाइन पर स्थित हैं. वहीं Central Railway के नेटवर्क पर कुल 194 फूड स्टॉल संचालित होते हैं, जिनमें से 152 स्टॉल सीएसएमटी से करजत, कसारा और पनवेल तक के उपनगरीय मार्गों पर हैं. इतनी बड़ी संख्या में स्टॉलों के संचालन के लिए लगातार गैस आपूर्ति बेहद जरूरी होती है.

स्थिति को देखते हुए IRCTC ने दोनों रेल जोनों के खानपान लाइसेंस धारकों को एक सलाह जारी की है. इसमें उन्हें यात्रियों के लिए भोजन सेवा को किसी भी स्थिति में बाधित न होने देने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही एलपीजी की संभावित कमी से निपटने के लिए वैकल्पिक साधनों जैसे माइक्रोवेव और इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल बढ़ाने की सलाह भी दी गई है.

इसके परिणामस्वरूप कई रेलवे स्टेशनों पर छोटे इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हों का उपयोग शुरू हो गया है. इन चूल्हों की मदद से पहले से तैयार भोजन को गर्म कर यात्रियों को परोसा जा रहा है, क्योंकि कुछ खाद्य पदार्थ ठंडे परोसना संभव नहीं होता. हालांकि इस व्यवस्था से ताजा तला हुआ भोजन उपलब्ध कराना अभी भी चुनौती बना हुआ है.

रेलवे अधिकारियों को यह भी चिंता है कि यदि एलपीजी संकट लंबा खिंचता है तो लंबी दूरी की ट्रेनों में खानपान सेवाओं में कटौती करनी पड़ सकती है. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन आपूर्ति की स्थिति लगातार बदल रही है और इस पर नजर रखी जा रही है.

इस बीच Railway Board के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी Satish Kumar ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को पत्र लिखकर रेलवे की आवश्यक सेवाओं के लिए एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है. रेलवे बोर्ड ने बताया है कि देशभर के लगभग 340 रेलवे स्टेशनों पर ट्रेन संचालन से जुड़ी आवश्यक सेवाओं के लिए करीब 8000 एलपीजी सिलेंडरों की जरूरत होती है.

रेलवे अधिकारियों के अनुसार क्रू रनिंग रूम और अन्य आवश्यक सुविधाओं के संचालन के लिए गैस की नियमित आपूर्ति अत्यंत जरूरी है. यदि आपूर्ति में बाधा आती है तो इसका असर ट्रेन संचालन और यात्रियों की सुविधाओं पर भी पड़ सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े संकट का असर अब स्थानीय स्तर की सेवाओं तक पहुंचने लगा है. रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाले छोटे नाश्ते और भोजन की उपलब्धता पर पड़ रहा यह असर उसी का एक उदाहरण है. यदि एलपीजी की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यात्रियों को अपने पसंदीदा नाश्तों के लिए कुछ समय तक इंतजार करना पड़ सकता है.