मुंबई. महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में मुलुंड स्टेशन पर एक आम दिन अचानक एक भयानक मोड़ ले गया. 14 मार्च को पुष्पा प्लेटफॉर्म 1 पर खड़ी थी, उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होने वाला है. जैसे ही एक लोकल ट्रेन पास आई, उसके पति राजू गुप्ता ने कथित तौर पर उसे पटरियों पर धकेल दिया. यात्री सन्न रह गए और जैसे ही ट्रेन चीखती हुई रुकी, प्लेटफॉर्म पर अफरा-तफरी मच गई. कुछ ही पलों में वह आदमी जो उसके साथ आया था, भीड़ में कहीं गायब हो गया.
पुष्पा अपने भाई कमलेश कुमार गुप्ता और अपने बच्चे के साथ उत्तर प्रदेश के देवरिया से मुंबई आई थी. उसी दिन उसके और उसके पति के बीच झगड़ा हो गया. बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों पति-पत्नी मुलुंड पुलिस स्टेशन चले गए. शायद यह स्थिति को शांत करने और पुलिस का दखल मांगने की एक कोशिश थी, क्योंकि मामला बहुत आगे बढ़ चुका था. स्टेशन से निकलने के बाद कमलेश कुमार अपना भूला हुआ बटुआ लेने के लिए कुछ देर के लिए घर वापस गया. उसी छोटे से अंतराल में घटना ने एक दुखद मोड़ ले लिया.
कैसे की हत्या?
स्टेशन पर यात्रियों की रोज़ाना की भीड़ के बीच, ऐसा लगता है कि बहस अपने चरम पर पहुंच गई थी. जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आई, पुष्पा को पटरियों पर धकेल दिया गया. आरोपी तुरंत वहां से भाग निकला और मुंबई के विशाल यात्री नेटवर्क में कहीं गुम हो गया. उसने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया, ताकि उसके पकड़े जाने का कोई सुराग न मिले. लेकिन जिस शहर में उसने गायब होने की कोशिश की थी.
पुलिस ने ऐसे लिया एक्शन
रेलवे पुलिस क्राइम ब्रांच के जांचकर्ताओं ने, ठाणे, दादर और वडाला की टीमों के साथ मिलकर, एक समन्वित तलाशी अभियान शुरू किया. ष्टष्टञ्जङ्क फुटेज जांच की रीढ़ बन गया. अधिकारियों ने एक-एक फ्रेम देखकर आरोपी की हर हरकत का पता लगाया. उसे मुलुंड से ठाणे जाते हुए और फिर दादर के लिए एक तेज लोकल ट्रेन में चढ़ते हुए देखा गया. वहां से वह पश्चिमी लाइन की ओर बढ़ा और विरार की तरफ चल दिया. स्टेशनों पर लगे लगभग 150 कैमरों को खंगाला गया. हालांकि सुराग बिखरे हुए थे, लेकिन उनसे एक साफ रास्ता बनने लगा. वह आदमी लगातार आगे बढ़ रहा था और महाराष्ट्र से बाहर जा रहा था.
कैसे हुई गिरफ्तारी?
जैसे ही सुरागों से गुजरात की ओर इशारा मिला, मुंबई पुलिस की एक टीम उसे पकडऩे के लिए तुरंत वहां पहुंच गई. सूरत की लोकल क्राइम ब्रांच की मदद से एक जाल बिछाया गया. अपराध होने के 20 घंटे के अंदर ही 42 साल के राजू अवधराम गुप्ता को सूरत में हिरासत में ले लिया गया. पूछताछ के दौरान उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया.

















