
गेहूं की खेती
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रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं इस समय कई क्षेत्रों में अंतिम चरण में पहुंच रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बुवाई से लेकर कटाई तक हर चरण महत्वपूर्ण होता है, लेकिन आखिरी सिंचाई फसल की गुणवत्ता और उपज तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाती है। यदि किसान सही समय पर अंतिम पानी देते हैं तो दाने मोटे, चमकदार और वजनदार बनते हैं, जिससे उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है।विशेषज्ञ बताते हैं कि सिंचाई का समय मिट्टी के प्रकार पर निर्भर करता है। भारी (काली या दोमट) मिट्टी में गेहूं की फसल को मिल्किंग स्टेज यानी जब दाने में दूध बन रहा हो, उस समय सिंचाई करना लाभकारी रहता है। वहीं रेतीली मिट्टी में बालियां पीली पड़ने लगें या दूध भरने के तुरंत बाद पानी देना उचित माना जाता है। देर से सिंचाई करने पर दानों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और समय से पहले पानी रोक देने पर दाने हल्के रह जाते हैं।
कृषि वैज्ञानिक यह भी सलाह देते हैं कि तेज हवा चलने के दौरान सिंचाई न करें, क्योंकि इससे फसल गिरने (लॉजिंग) का खतरा बढ़ जाता है। मौसम पूर्वानुमान देखकर ही सिंचाई का निर्णय लें और संभव हो तो रात के समय हल्की सिंचाई करें, ताकि पानी का बेहतर अवशोषण हो सके।
पोषक तत्व प्रबंधन भी इस चरण में महत्वपूर्ण है। अंतिम समय में नाइट्रोजन का प्रयोग कम रखें, क्योंकि अधिक नाइट्रोजन से फसल कमजोर होकर गिर सकती है। इसके बजाय पोटाश, फास्फोरस और बोरॉन का संतुलित छिड़काव करने से दाने अच्छी तरह भरते हैं और फसल मजबूत रहती है। कुल मिलाकर, सही समय पर आखिरी सिंचाई और संतुलित पोषण प्रबंधन से किसान बेहतर गुणवत्ता और अधिक उपज प्राप्त कर सकते हैं।





