किसानों की कमाई कई गुना : एक खेत, कई फसलें… सहफसली खेती बन रही फसलों का सफल मॉडल

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सहफसली खेती बन रही फसलों का सफल मॉडल – फोटो : AI Image

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किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए नई तकनीकों को अपना रहे हैं, जिससे उन्हें फायदा हो रहा है। इन्हीं में से एक सहफसली खेती (इंटरक्रॉपिंग) का मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस पद्धति में किसान एक ही खेत में एक साथ दो या अधिक फसलें उगाते हैं, जिससे जमीन का बेहतर उपयोग होता है और आमदनी में कई गुना बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट कहते हैं कि सही मौसम, उपयुक्त मिट्टी और वैज्ञानिक तरीके से फसल चयन करने पर एक ही खेत से चार गुना तक मुनाफा कमाया जा सकता है। फरवरी का महीना अगेती भिंडी की खेती के लिए अनुकूल माना जाता है। इस समय तापमान संतुलित रहता है, जिससे फसल की बढ़वार अच्छी होती है।

भिंडी के साथ मूली, पालक-धनिया का बेहतर संयोजन
एक्सपर्ट के मुताबिक, किसान भिंडी को मुख्य फसल बनाकर उसके साथ मूली, पालक, धनिया और चुकंदर जैसी सहफसलें उगा सकते हैं। मूली को थोड़ी गहराई में बोया जाता है, जबकि पालक और धनिया सतह के पास उगते हैं। इससे एक ही खेत की अलग-अलग परतों का सही उपयोग होता है।

भिंडी के साथ बोई गई मूली 25 से 30 दिनों में तैयार हो जाती है। पालक 30-35 दिनों में बाजार में पहुंच सकता है, जबकि धनिया भी एक महीने के भीतर कटाई के लिए तैयार हो जाता है। चुकंदर भी जल्दी उत्पादन देने वाली फसल है।

जोखिम कम, मुनाफा ज्यादा
सहफसली खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर एक फसल खराब हो जाए या उसका बाजार भाव गिर जाए, तो दूसरी फसल से नुकसान की भरपाई हो जाती है। इससे किसानों का जोखिम कम होता है और आय सुनिश्चित रहती है। साथ ही, खेत की खाली जगह का पूरा उपयोग होने से लागत भी घटती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तकनीक को कंपैनियन क्रॉपिंग या मल्टी क्रॉपिंग भी कहा जाता है। इसमें अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत और अलग वृद्धि अवधि वाली फसलों का चयन किया जाता है।

कई किसान इंटरक्रॉपिंग मॉडल को अपनाकर लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। 30 दिनों के भीतर सब्जियां बाजार में पहुंचने लगती हैं, जिससे लागत जल्दी निकल आती है और शुद्ध लाभ शुरू हो जाता है। सहफसली खेती अब इस क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी जरिया बनती जा रही है।