
बासमती चावल
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Rice Export: भारतीय चावल निर्यातकों के लिए मध्य पूर्व के अहम बाजार ‘लेबनान’ में अब अपनी पकड़ बनाए रखना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो गया है। भारत सरकार ने लेबनान को चावल भेजने वाले निर्यातकों के लिए एक खास एडवाइजरी जारी की है। इस चेतावनी की मुख्य वजह लेबनान की नई और सख्त गुणवत्ता नीति है, जो सीधे तौर पर यूरोपीय मानकों से जुड़ी है।आखिर क्या है लेबनान का नया नियम?
दरअसल, 22 जनवरी को लेबनान के कृषि मंत्रालय ने भारत को सूचित किया है कि अब आयातित चावल में कीटनाशक अवशेषों (Pesticide Residues) की मात्रा को यूरोपीय संघ (EU) के मानकों के अनुसार ही स्वीकार किया जाएगा।
खाद्य पदार्थों में कीटनाशक की अधिकतम सीमा को एमआरएल (Maximum Residue Level) कहा जाता है। इसका मतलब है कि अगर लेबनान पहुंचने वाले भारतीय चावल में एमआरएल की सीमा यूरोपीय मानकों से ज्यादा पाई गई, तो पूरी की पूरी खेप (Consignment) अस्वीकार करके वापस भेजी जा सकती है।
सरकार (APEDA) ने क्यों जारी किया अलर्ट?
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने निर्यातकों को सख्त हिदायत दी है कि वे लेबनान खेप भेजने से पहले जोखिम कम करने के उपाय अपनाएं।
बाजार की कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले एक साल में कीटनाशकों की अधिक मात्रा के कारण लेबनान में चावल की कुछ खेपें रोकी गई थीं। हालांकि, लेबनान प्रशासन की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन किसी भी बड़े नुकसान से बचने के लिए भारत सरकार ने एहतियातन यह कदम उठाया है।
लेबनान में कैसा है भारतीय चावल का बाजार
सख्त नियमों के बावजूद, लेबनान में भारतीय चावल की भारी मांग है। कैलेंडर वर्ष 2025 में भारत ने लेबनान को 21,438 टन बासमती चावल का निर्यात किया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 21,430 टन था, जो प्रीमियम क्वालिटी की स्थिर मांग को दर्शाता है। सबसे बड़ी छलांग गैर-बासमती (Non-basmati) चावल के निर्यात में देखी गई है। यह 122% की भारी बढ़ोतरी के साथ 2,057 टन (पिछले साल) से बढ़कर 4,571 टन हो गया है।
ये आंकड़े बताते हैं कि लेबनान में भारतीय चावल को काफी पसंद किया जा रहा है, लेकिन भविष्य में इस बाजार को बचाए रखने के लिए निर्यातकों को यूरोपीय संघ के कीटनाशक मानकों (EU MRLs) पर खरा उतरना ही होगा।






