
मूंग की खेती – फोटो : सोशल मीडिया
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गर्मियों के मौसम में मूंग की खेती किसानों के लिए कम समय में अच्छा मुनाफा कमाने का भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर रही है। यह फसल केवल 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है और एक एकड़ से 50 से 80 हजार रुपये तक की आमदनी दे सकती है। खास बात यह है कि मूंग दलहनी फसल होने के कारण अपनी जड़ों में मौजूद राइजोबियम बैक्टीरिया की मदद से जमीन में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती है, जिससे खेत की उर्वरक क्षमता सुधरती है।बुवाई का सही समय और खेत की तैयारी
विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी-मार्च के बीच बुवाई सबसे उपयुक्त रहती है। इस समय फूल आने पर हल्की ठंडक बनी रहती है, जिससे फूल झड़ने की समस्या कम होती है। खेत तैयार करते समय फसल अवशेषों को रोटावेटर से मिट्टी में मिलाएं। प्रति एकड़ एक बैग डीएपी, 10-15 किलो यूरिया और 5 किलो सल्फर का उपयोग लाभकारी रहता है।
उन्नत किस्में और बीज दर
तलवार मूंग, पीडीएम 139 सम्राट, बंसी गोल्ड और शिखा जैसी किस्में पीला मोजेक वायरस के प्रति सहनशील मानी जाती हैं। कतार से कतार की दूरी 12 इंच रखें और प्रति एकड़ 10-12 किलो बीज पर्याप्त होता है। बुवाई से पहले बीज उपचार जरूर करें।
सिंचाई और कीट प्रबंधन
पूरे चक्र में 3-4 सिंचाई पर्याप्त होती है। फूल आने के समय नमी बनाए रखना जरूरी है। कीट नियंत्रण के लिए 25-30 दिन बाद हल्का छिड़काव और जरूरत पड़ने पर कोराजन या इमामेक्टिन बेंजोएट का प्रयोग किया जा सकता है। सही प्रबंधन के साथ मूंग की खेती किसानों के लिए कम लागत में अधिक लाभ का मजबूत जरिया साबित हो सकती है।






