गर्मी में उगाएं सोना : वैज्ञानिक तरीके से करें खरबूजे की खेती, पाएं ज्यादा पैदावार और बेहतर मुनाफा

0
0

खरबूजे की खेती – फोटो : गांव जंक्शन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गर्मी के मौसम में खरबूजा की फसल किसानों को अच्छा मुनाफा देती है। फरवरी-मार्च में समय पर बुआई करने से किसान कम अवधि में अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। अधिक उत्पादन के लिए दोमट मिट्टी का चयन, खेत की अच्छी तैयारी और उचित जल निकास बेहद जरूरी है। साथ ही, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, वैज्ञानिक तरीके से सिंचाई और प्रभावी खरपतवार नियंत्रण अपनाना चाहिए। 

कृषि विज्ञान केंद्र, लखीमपुर के अध्यक्ष एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. विश्वकर्मा ने बताया कि खरबूजे की खेती के लिए पूसा शरबती, पूसा मधुरस और काशी मधु जैसी किस्में अधिक उत्पादन देती हैं। खरबूजे की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 3.5 से 5 किलो बीज काफी है। कतारों के बीच 3 मीटर और पौधों के बीच 0.5 मीटर का फासला रखना चाहिए।

3 से 4 जुताई कर तैयार करें खेत 
खरबूजे की खेती के लिए बलुई दोमट या अच्छी जल निकास वाली दोमट भूमि उपयुक्त मानी जाती है। इसकी खेती नदी किनारे की भूमि में सबसे अच्छी होती है। मिट्टी का पीएच 6 से 7 के बीच होना चाहिए। खेत की 3-4 बार जुताई कर नालियां और थाले तैयार करें। फिर, मिट्टी में पर्याप्त नमी होने पर बुआई करें ताकि बीज का अंकुरण और पौधों की बढ़वार अच्छी हो सके।

ऐसे करें पोषक तत्वों का प्रबंधन
अच्छी पैदावार के लिए बुआई से 3-4 सप्ताह पहले 20-25 टन प्रति हेक्टेयर सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट खेत में मिला दें। साथ ही, 80 किग्रा नाइट्रोजन, 50 किग्रा फॉस्फोरस और 50 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर दें। फॉस्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा तथा नाइट्रोजन की एक-तिहाई मात्रा बुआई के समय दें। शेष नाइट्रोजन 25-30 दिन और 40-50 दिन बाद टॉप ड्रेसिंग के रूप में दें।

खरपतवार नियंत्रण का ये है तरीका
खरबूजा की खेती में खरपतवार से 20-80 प्रतिशत तक उत्पादन घट सकता है। बुआई के 48 घंटे के भीतर स्टॉम्प 3-5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इससे 30-40 दिन तक खरपतवार नियंत्रित रहते हैं। इसके अलावा, 30-35 दिन तक नालियों और थालों की निराई-गुड़ाई कर मिट्टी चढ़ाना जरूरी है, जिससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है।

सिंचाई एवं जल प्रबंधन
गर्मी के मौसम में 4-7 दिन के अंतराल पर फसल की सिंचाई करें। खेत में जलभराव न होने दें और अधिक वर्षा की स्थिति में पानी की निकासी सुनिश्चित करें। फल बनने के बाद सिंचाई कम कर दें। विशेषकर फलों के पकने के समय पानी न दें, क्योंकि इससे मिठास, घुलनशील तत्व और विटामिन-सी की मात्रा घट सकती है।

फल मक्खी के प्रकोप से बचाएं फसल
खरबूजा की फसल में लाल कद्दू भृंग और फल मक्खी प्रमुख कीट हैं, जो पत्तियों और फलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इन कीटों के नियंत्रण के लिए समय पर छिड़काव और संक्रमित फलों को नष्ट करना आवश्यक है। चूर्णी फफूंद, जड़ गलन और एन्थ्रेक्नोज जैसे रोगों से बचाव के लिए बीज उपचार और अनुशंसित दवाओं का प्रयोग करें।