ठाणे. कथित धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार क्रिप्टो प्लेटफॉर्म CoinDCX के सह-संस्थापकों को बड़ी राहत मिली है. ठाणे की अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपों को लेकर ठोस मामला नहीं बनता और इसी आधार पर दोनों आरोपियों को जमानत दे दी गई. कोर्ट के इस फैसले को कंपनी और क्रिप्टो इंडस्ट्री के लिए अहम माना जा रहा है.
मामले की सुनवाई करते हुए मजिस्ट्रेट निलेश राठौड़ ने दोनों सह-संस्थापकों की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया. अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर फिलहाल ऐसा कोई ठोस आधार नहीं दिखता, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों ने जानबूझकर धोखाधड़ी की है.
यह मामला कथित वित्तीय अनियमितताओं और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़ा हुआ है. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंपनी के संचालन और निवेश से जुड़े कुछ निर्णयों के कारण निवेशकों को नुकसान हुआ है. हालांकि, बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि यह मामला आपराधिक नहीं बल्कि व्यावसायिक निर्णयों और बाजार जोखिम से जुड़ा है, जिसे गलत तरीके से आपराधिक रंग दिया गया.
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी माना कि शुरुआती जांच में ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों ने धोखाधड़ी की नीयत से कोई काम किया हो. इसी आधार पर कोर्ट ने कहा कि आरोपियों को हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है और उन्हें जमानत दी जा सकती है.
इस फैसले के बाद कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश डिजिटल और क्रिप्टो सेक्टर से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है. अक्सर ऐसे मामलों में व्यावसायिक जोखिम और आपराधिक कृत्य के बीच अंतर करना चुनौतीपूर्ण होता है, और अदालत का यह रुख इसी अंतर को स्पष्ट करने की दिशा में देखा जा रहा है.
गौरतलब है कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े मामलों में नियमन और कानूनी ढांचे को लेकर अभी भी स्पष्टता की कमी बनी हुई है. ऐसे में इस तरह के मामलों में अदालतों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. फिलहाल, इस केस में जमानत मिलने के बाद आगे की सुनवाई और जांच के नतीजों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे.

















