
देशभर में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी E20 पेट्रोल की आपूर्ति तेजी से बढ़ाई जा रही है। सरकार इसे कच्चे तेल के आयात में कमी, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदूषण घटाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। वहीं दूसरी ओर पुराने वाहन मालिकों की चिंताएं भी बढ़ रही हैं। ऑटो वर्कशॉप पर पहुंचने वाले कई ग्राहक माइलेज कम होने, इंजन की परफॉर्मेंस घटने, स्टार्टिंग में दिक्कत, फ्यूल सिस्टम में खराबी और समय से पहले सर्विस की जरूरत पड़ने जैसी शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सभी वाहनों में ऐसी समस्या नहीं आती और इसका सीधा संबंध वाहन की उम्र, तकनीक, रखरखाव और E20 कम्पैटिबिलिटी से है।
लखनऊ के ऑटो मैकेनिक शकील अहमद बताते हैं कि पिछले कुछ महीनों में उनकी वर्कशॉप पर 2018 से पहले की बाइक और स्कूटर लेकर आने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। अधिकांश वाहन चालक माइलेज कम होने, सुबह इंजन स्टार्ट होने में दिक्कत, एक्सीलेरेशन कम मिलने और इंजन के रफ चलने की शिकायत कर रहे हैं। शकील का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन लंबे समय तक टंकी में रहने पर नमी को अपनी ओर खींच सकता है। अगर वाहन कई दिनों तक खड़ा रहे तो फ्यूल सिस्टम पर इसका असर दिखाई देने लगता है। ऐसे मामलों में फ्यूल फिल्टर, स्पार्क प्लग, थ्रॉटल बॉडी और इंजेक्टर की सफाई पहले की तुलना में अधिक करनी पड़ रही है। उनका कहना है कि समय पर सर्विस नहीं कराने वाले वाहनों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है।
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फिल्टर, इंजेक्टर और पंप पर बढ़ रहा दबाव
कानपुर के ऑटो मैकेनिक राजेश वर्मा का कहना है कि E20 पेट्रोल आने के बाद पुरानी कारों में फ्यूल फिल्टर जल्दी चोक होने के मामले बढ़े हैं। कई ग्राहकों की गाड़ियों में इंजेक्टर की सफाई सामान्य से पहले करनी पड़ रही है, जबकि कुछ मामलों में फ्यूल लाइन और रबर सील भी बदलनी पड़ी है। राजेश बताते हैं कि पहले जहां कई वाहन 20 से 25 हजार किलोमीटर तक बिना किसी बड़ी दिक्कत के चलते थे, वहीं अब कुछ पुरानी गाड़ियों में 10 से 15 हजार किलोमीटर के भीतर ही फ्यूल सिस्टम की जांच और सफाई की जरूरत पड़ रही है। उनका कहना है कि यदि समय पर सर्विस न कराई जाए तो फ्यूल पंप और इंजेक्टर खराब होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे वाहन मालिक का खर्च भी बढ़ सकता है।
फर्रुखाबाद के टू-व्हीलर वर्कशॉप संचालक विनीत झा का कहना है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद पुरानी गाड़ियों का औसत (माइलेज) पहले की तुलना में कम हुआ है। इसके कारण वाहन मालिकों को पहले से जल्दी-जल्दी सर्विस करानी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि नई गाड़ियों में भी कुछ मामलों में इंजेक्टर में कचरा फंसने की शिकायतें सामने आई हैं। उनके अनुसार पेट्रोल और एथेनॉल के गुण अलग-अलग होने के कारण फ्यूल सिस्टम में जमा अशुद्धियां पंप और इंजेक्टर तक पहुंचकर परेशानी पैदा कर सकती हैं।
विनीत झा ने बताया कि हाल ही में बरेली से आई एक रॉयल एनफील्ड बुलेट की पेट्रोल टंकी में एथेनॉल चाशनी जैसी परत बनकर जम गया था। इसके चलते फ्यूल पंप खराब हो गया और इंजेक्टर तक पेट्रोल की सप्लाई बंद हो गई। पूरी टंकी, फ्यूल लाइन और इंजेक्टर की सफाई के बाद ही बाइक दोबारा चल सकी।
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टू-व्हीलर चालकों की सबसे बड़ी शिकायत- माइलेज और पिकअप
वर्कशॉप संचालकों के अनुसार सबसे ज्यादा शिकायतें बाइक और स्कूटर मालिकों से मिल रही हैं। कई लोगों का कहना है कि E20 पेट्रोल भराने के बाद माइलेज में कमी आई है, जबकि कुछ वाहन चालकों ने पिकअप कमजोर होने और इंजन के पहले जैसा रिस्पॉन्स नहीं मिलने की बात कही है। हालांकि, यह समस्या हर वाहन में नहीं देखी गई है।
कारों में क्या दिक्कतें आ रही हैं?
मैकेनिकों के अनुसार E20 के लिए तैयार नहीं की गई पुरानी कारों में समय के साथ फ्यूल पाइप, रबर सील, फ्यूल पंप और इंजेक्टर पर असर पड़ सकता है। यदि समय पर सर्विस और जांच नहीं कराई जाए तो मरम्मत का खर्च बढ़ सकता है। वहीं नई E20-रेडी कारों में ऐसी शिकायतें अपेक्षाकृत कम देखने को मिल रही हैं।
क्यों घट जाता है माइलेज?
ऑटो विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम होती है। इसी वजह से कई वाहनों में 3 से 8 प्रतिशत तक माइलेज कम महसूस हो सकता है। वास्तविक अंतर वाहन की तकनीक, इंजन ट्यूनिंग और ड्राइविंग स्टाइल पर निर्भर करता है।ऑटो विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वाहन निर्माता कंपनी ने आपकी कार या बाइक को E20 कम्पैटिबल घोषित किया है तो सामान्य परिस्थितियों में घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन पुराने वाहनों में समय-समय पर फ्यूल फिल्टर, इंजेक्टर, फ्यूल लाइन और फ्यूल पंप की जांच कराना जरूरी है। लंबे समय तक वाहन बिना चलाए खड़ा रखने से भी बचना चाहिए।