महराजगंज में 29 अक्टूबर 2026 को फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत प्रचार वाहन रवाना किया गया। यह ग्रामीण इलाकों में किसानों को पराली जलाने के नुकसान और फसल अवशेषों के सही प्रबंधन के बारे में जागरूक करेगा। जिलाधिकारी ने किसानों से फसल अवशेष खेतों में न जलाने और आधुनिक तकनीकों से उनका प्रबंधन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मानव स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। इससे मिट्टी की उर्वरता घटती है और जमीन के लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं। इसका असर कृषि उत्पादन और पर्यावरण के संतुलन पर भी पड़ता है। जिलाधिकारी ने कहा कि फसल अवशेषों का सही प्रबंधन पर्यावरण बचाने और मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए जरूरी है। किसान कृषि विभाग की योजनाओं, अनुदान पर मिलने वाले कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल कर पराली का प्रबंधन करें। इससे पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और खेतों की उर्वरता बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत पराली जलाने पर जुर्माने और अन्य दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। जिला प्रशासन किसानों को जागरूक कर ऐसी कार्रवाई से बचाना चाहता है। इसके लिए किसानों का सहयोग जरूरी है। जिलाधिकारी ने जिले के सभी किसानों से पराली न जलाने और जिम्मेदार कृषि तरीके अपनाने की अपील की। इस मौके पर उप निदेशक कृषि संजीव कुमार, अतिरिक्त उपजिलाधिकारी सिद्धार्थ, जिला कृषि अधिकारी एसपी सिंह और कृषि विभाग के संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
महराजगंज में किसानों को पराली न जलाने की अपील:प्रचार वाहन गांवों में जागरूक करेगा; जलाने पर जुर्माने और कार्रवाई का प्रावधान
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