ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी बाज नहीं आया पाकिस्तान, चंदे के पैसों से लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों की मरम्मत शुरू

पाकिस्तान की घिनौनी करतूतें एक बार फिर सामने आई हैं। भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के कई ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था, लेकिन अब आतंकी संगठन उन्हीं खंडहरों को खड़ा करने की साजिश में जुट गए हैं। सैटेलाइट से मिली नई तस्वीरों ने पाकिस्तान की पोल खोल दी है कि किस तरह वहां के आतंकी चंदे के पैसों से तबाह हो चुकी इमारतों की मरम्मत कर रहे हैं।

 

सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आया सच

 

मुरीदके से आई मैक्सर टेक्नोलॉजी की तस्वीरें इसका पुख्ता सबूत हैं। 9 अप्रैल 2025 की तस्वीर में भारतीय सेना के हमले के बाद आतंकी अड्डे पूरी तरह ध्वस्त दिख रहे थे, जबकि 7 मई की तस्वीर में साफ दिखाई दे रहा है कि पाकिस्तान ने मरम्मत का काम शुरू करवा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक लश्कर और जैश को इसमें पाकिस्तानी हुकूमत का भी सीधा समर्थन मिल रहा है।

 

 

बुलडोजर से हटाया मलबा, शुरू हुआ निर्माण

 

खबरों के अनुसार 18 अगस्त को लश्कर ने कई बुलडोजर और भारी मशीनरी वहां तैनात कर दी। सबसे पहले मलबा हटाया गया और अब ध्वस्त इमारतों को फिर से खड़ा किया जा रहा है। यह वही ठिकाने हैं जिन्हें भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तबाह किया था। उस समय लश्कर और जैश के कई मुख्य अड्डे मलबे में तब्दील हो गए थे।

बुलडोजर से हटाया मलबा, शुरू हुआ निर्माण

 

खबरों के अनुसार 18 अगस्त को लश्कर ने कई बुलडोजर और भारी मशीनरी वहां तैनात कर दी। सबसे पहले मलबा हटाया गया और अब ध्वस्त इमारतों को फिर से खड़ा किया जा रहा है। यह वही ठिकाने हैं जिन्हें भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तबाह किया था। उस समय लश्कर और जैश के कई मुख्य अड्डे मलबे में तब्दील हो गए थे।

 

 

आतंकी सरगनाओं को मिली जिम्मेदारी

 

जानकारी के मुताबिक लश्कर के मुख्यालय को दोबारा बनाने की जिम्मेदारी मौलाना अबू जार को दी गई है, जो मरकज तैयबा का डायरेक्टर है। उसके साथ लश्कर का कुख्यात ट्रेनर और ऑपरेशनों का मास्टरमाइंड युनूस शाह बुखारी भी इस मिशन में शामिल है। फिलहाल संगठन ने अपना ट्रेनिंग कैंप बहावलपुर के मरकज अक्सा में शिफ्ट किया हुआ है, जिसकी निगरानी अब्दुल राशिद मोहसिन कर रहा है, जो सैफुल्लाह कसूरी का खास आदमी माना जाता है।

 

 

बाढ़ पीड़ितों के नाम पर जुटाया जा रहा चंदा

 

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन आतंकी ठिकानों को बनाने के लिए लश्कर-ए-तैयबा खुलेआम चंदा जुटा रहा है। पाकिस्तान सरकार ने अगस्त में ही इस संगठन को 1.25 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद दी थी। इसके बावजूद और ज्यादा फंड जुटाने के लिए लश्कर अब बाढ़ पीड़ितों के नाम पर लोगों को गुमराह कर रहा है। दरअसल, पाकिस्तान की धरती एक बार फिर आतंक की नई फैक्ट्री तैयार करने में लगी हुई है और इसमें उसकी सरकार से लेकर आतंकी संगठन तक सब शामिल हैं।

 

 

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